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मंडी : 82 करोड़ की लागत से बनी ऊहल परियोजना हुई ठप, पुनर्निर्माण कार्य शुरू

मंडी (नितेश सैनी/संवाददाता),

हिमाचल प्रदेश में हुई भारी आपदा और बाढ़ से हुये प्रभावित लोगों के हाल चाल जानने आये उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मंडी शहर का दौरा भी किया और बाढ़ से हुए नुकसान का भी जायजा लिया | साथ ही उन्होंने मंडी के डीआरडीए सभागार में प्रेस वार्ता को भी संबोधित करते हुए कहा कि मंडी शहर को दो परियोजनाओं के द्वारा पानी वितरित किया जाता है जिनमें से ऊहल परियोजना पूरी तरह से ठप हो चुकी है जो लगभग 82 करोड़ की लागत से बनी है और उसका पुनर्निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पड्डल जल परियोजना का उन्होंने स्वयं भ्रमण किया और कहा कि पड्डल जल परियोजना भी ध्वस्त हो गई है क्योंकि बाढ़ का पानी उसके ऊपर से गुजरा है। उन्होंने कहा कि पड्डल जल परियोजना मंडी शहर के लिए वैकल्पिक परियोजना है जिसको फिर से सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 2 करोड रुपए का खर्च आंका गया है। उन्होंने बताया कि रातो रात मशीनरी मंगवाई गई और मैन पावर को भी डबल कर दिया गया है औऱ आज रात या फिर कल तक मंडी शहर में पानी बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस दौरान उन्होंने कहा कि पड्डल परियोजना का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा और भविष्य के लिए इस परियोजना को बचा कर रखा जाएगा ताकि विपरीत परिस्थितियों में इस योजना से लोगों के लिए सुविधा मुहैय्या करवाई जा सके। उन्होंने कहा कि मंडी शहर में वैकल्पिक तौर पर 60 टैंकर लगयें गए है जो पानी की आपूर्ति को पूरा करेंगे और यदि और भी जरूरत पड़ती है तो उसकी भी जलशक्ति विभाग द्वारा व्यवस्था करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मंडी में पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से जारी हो इसलिए वे खुद मंडी में रुके है। ताकि विभाग को किसी भी प्रकार की कमी महसूस न हो। उन्होंने कहा कि 10 हजार 3 सौ के आसपास जल शक्ति विभाग की योजनाऐं है जिसमें से 5 हज़ार  योजनाएं प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि भूतकाल में ऐसा कभी भी नही हुआ है, और लगभग 1 हज़ार करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग हमारे साथ सहानुभूति प्रकट कर रहे हैं कि हम आपके साथ हैं। उन्होंने कहा कि जुबानी सहानुभूति से कुछ नही होगा, हमारा पहाड़ी प्रदेश है और कर्ज में डूब हुआ प्रदेश है हमारी मदत की जाए। उन्होंने कहा कि हमने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया था कि इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए लेकिन उन्होंने नहीं किया हमने केंद्र से पैकेज की मांग की उन्होंने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि हम नुकसान का आंकलन करके केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजेंगे उसमें हम चाहेंगे कि केंद्र सरकार द्वारा हमे कुछ हिस्सा प्रदान किया जाए ताकि राहत और बचाव कार्य को गति मिल सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार हर संभव प्रयास कर रही है लेकिन केंद्र सरकार को सहानुभूति की परिभाषा समझनी चाहिए।

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