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प्रसिद्ध हिमाचली लोकगायक इन्द्र जीत राष्ट्रीय सम्मान ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार’ से होंगे सम्मानित।

कुल्लू ( आशा डोगरा , सब एडिटर ),

कुल्लू, हिमाचल प्रदेश। हिमाचल प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि प्रदेश के प्रसिद्ध लोकगायक इन्द्र जीत का चयन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन स्वायत्तशासी संस्था संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए किया गया है। 10 जून 2025 को संगीत नाटक अकादमी द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा में इन्द्र जीत के नाम की घोषणा की गई, जिससे प्रदेश के सांस्कृतिक, सामाजिक एवं लोकसंगीत जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।

जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश के निवासी इन्द्र जीत ने हिमाचली लोकसंगीत, लोकसंस्कृति एवं पारंपरिक लोकधरोहर के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया है। बिना किसी औपचारिक संगीत प्रशिक्षण के उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रतिभा, अथक परिश्रम एवं समर्पण के बल पर लोकगायन के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनके गीतों में हिमाचल की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय बोलियों, रीति-रिवाजों तथा पहाड़ी जीवन की जीवंत झलक देखने को मिलती है।

इन्द्र जीत के लोकप्रिय गीतों में “लाड़ी शाऊंणी”, “पाखली माणु”, “बुधूआ मामा”, “तिरछी नज़रे”, “सोलमा लाड़ी” सहित अनेक सुपरहिट गीत शामिल हैं, जिन्हें देश-विदेश में बसे हिमाचलियों तथा लोकसंगीत प्रेमियों द्वारा भरपूर सराहना मिली है। डिजिटल एवं सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से उनके गीत करोड़ों दर्शकों और श्रोताओं तक पहुंचे हैं, जिससे हिमाचली लोकसंगीत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

लोकसंगीत के क्षेत्र में योगदान के साथ-साथ इन्द्र जीत ने अपने गीतों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण को भी प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया है। उनका लोकप्रिय गीत “पाखली माणु” हिमाचली टोपी में मोनाल पक्षी की वास्तविक कलगी के स्थान पर कृत्रिम कलगी के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रूप से चर्चित रहा। इस गीत को यूट्यूब पर करोड़ों बार देखा जा चुका है, जबकि लाखों लोगों ने कृत्रिम कलगी को अपनाकर वन्यजीव संरक्षण के इस जन-जागरूकता अभियान को समर्थन दिया है। उनकी इस सराहनीय पहल के लिए उन्हें वन एवं वन्यजीव विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रशंसा-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जा चुका है।

इन्द्र जीत ने लोकसंगीत को केवल मनोरंजन का माध्यम न बनाकर सामाजिक परिवर्तन और जन-जागरूकता का सशक्त माध्यम बनाया है। उनके गीतों में नशा मुक्ति, महिला सम्मान, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उनका नशा-विरोधी गीत “मता करदे नशा” युवाओं को नशे से दूर रहने की प्रेरणा देता है, जबकि “चिट्टा मुक्त हिमाचल” गीत ने प्रदेश में नशे के विरुद्ध चल रहे जन-जागरूकता अभियानों को नई मजबूती प्रदान की है।

अपनी उल्लेखनीय सेवाओं एवं योगदान के लिए इन्द्र जीत को समय-समय पर विभिन्न सरकारी विभागों, सामाजिक संस्थाओं एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सम्मानित और प्रशंसित किया जाता रहा है। उन्होंने हिमाचली लोकसंगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज वे हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय एवं प्रभावशाली लोकगायकों में गिने जाते हैं।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार देश के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सांस्कृतिक सम्मानों में से एक है, जो भारतीय कला, संगीत, नृत्य, रंगमंच और लोककलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले युवा कलाकारों को प्रदान किया जाता है। इन्द्र जीत को यह सम्मान मिलना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, लोकसंगीत और सांस्कृतिक विरासत का भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर प्रदेश के सांस्कृतिक, सामाजिक एवं कला जगत से जुड़े लोगों ने इन्द्र जीत को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। यह सम्मान प्रदेश के युवा कलाकारों को अपनी लोकसंस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित करेगा तथा हिमाचली लोकसंगीत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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