ब्यूरो रिपोर्ट।
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद दोबारा जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले कब्जाधारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कांगड़ा जिले की पालमपुर तहसील के मोहाल लहला खास से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपियों की याचिका खारिज कर दी।मामले के अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2015 में पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दूसरे पक्ष को जमीन में दखल देने से रोक दिया था। फैसला अंतिम होने के बावजूद मई 2016 में आरोपियों ने खेत में घुसकर कथित तौर पर गाली-गलौज की और जमीन पर जबरन कब्जा करते हुए बुआई शुरू कर दी।अदालती आदेश की खुली अवहेलना के मामले में पालमपुर कोर्ट ने दोषियों को तीन महीने की जेल और छह महीने के लिए संपत्ति कुर्क करने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने वालों के खिलाफ जेल और संपत्ति कुर्की जैसी कार्रवाई कानून के तहत पूरी तरह जायज है।हाईकोर्ट के इस फैसले से साफ संदेश गया है कि अदालत के आदेश को नजरअंदाज कर जमीन पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानून सख्त कार्रवाई करेगा।
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