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शिमला : राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय संजौली में धूमधाम से मनाया गया संस्कृत दिवस व सप्ताह

शिमला (विकास शर्मा/ब्यूरो चीफ),

आज शिमला शहर के राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय संजौली में संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत दिवस व सप्ताह के उपलक्ष पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. भारती भागड़ा ने शिरकत की । संस्कृत सप्ताह के मौके पर कार्यक्रम से पहले अनुवाद व पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । पोस्टर मेकिंग में तनिषा प्रथम, पंकज द्वितीय और काजल तृतीय स्थान पर रही । कार्यक्रम में वविद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा में शास्त्रीय नृत्य, नाटी, मधुराष्टकम्, संस्कृत गीतिका , शूरा वयं और संस्कृत भाषण प्रस्तुत किये। संस्कृत विषय के प्रोफेसर डॉ. राकेश शर्मा ने बताया कि “संस्कृत बहुत ही महत्वपूर्ण व प्राचीन भाषा है, यह हम सभी का दायित्व है कि हमें इस भाषा को संजोए रखना है। आज हम सब विश्व संस्कृत दिवस मना रहे हैं। भारतीय कैलेंडर के अनुसार संस्कृत दिवस हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। संयोगवश इसी दिन को हम रक्षा बंधन के त्यौहार के रूप मे भी मनाते हैं, इस वर्ष यह 19-अगस्त, सोमवार को मनाया गया, 19 अगस्त से लेकर 25 अगस्त को समस्त भारतदेश में संस्कृत सप्ताह मनाया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत संस्कृत से संबंधित विभिन्न गतिवधियाँ होती हैं। संजौली महाविद्यालय में भी 19 अगस्त को संस्कृत अनुवाद प्रतियोगिता करवाई गई, 20 अगस्त को संस्कृत साहित्य से संबंधित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता करवाई गई और आज 21 अगस्त को संस्कृत दिवस और संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष पर संस्कृत से संबंधित सांस्कृतिक गतिविधियां करवाई जा रही हैं। संस्कृत भाषा हमारे भारत देश की सबसे प्राचीनतम, अलंकृत, तर्कसम्मत, व्याकरण के नियमों से परिशोधित, परिष्कृत, परिमार्जित, शास्त्रीय तथा वैज्ञानिक भाषा है। संस्कृत भाषा को देववाणी और कई भाषाओं की जननी माना जाता है,  इस भाषा ने विश्वभर के भाषा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। विश्व की सबसे पुरातन पुस्तक ‘ऋग्वेद’की भाषा भी संस्कृत ही है। ऋग्वेदकाल से लेकर आज तक संस्कृत भाषा के माध्यम से सभी प्रकार के वांगमय की रचना होती आ रही है। भारतीय संस्कृति का रहस्य इसी भाषा में निहित है। इस भाषा में धार्मिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक और मानविकी इत्यादि अनेक प्रकार के वांगमय की रचना हुई है।” अंत में मुख्यातिथि महोदया ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए सभी विद्यार्थीयों को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में डॉ बबीता ठाकुर, प्रो. अरुण कुमार, डॉ हेमलता, प्रो. हिमानी सक्सेना आदि तथा साहित्य परिषद के सभी सदस्य मुख्य रूप से शामिल रहे।

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