खेल जगत

चंबा : चंबा के अजय शर्मा का भारतीय वालीबॉल टीम में हुआ चयन

चंबा (ब्यूरो रिपोर्ट),

जिला चंबा के एक छोटे से क्षेत्र जुम्महार, गांव प्रेहल्ला के रहने वाले अजय शर्मा का जन्म एक छोटे से परिवार में हुआ था। अजय बचपन से ही खेलों में काफी रुचि रखते थे। वह खेलों के साथ-साथ पढ़ाई में भी काफी अव्वल रहे। उनका बचपन का सपना भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना था। अजय ने अपनी पढ़ाई दसवीं तक अपने गांव से 5 किलोमीटर दूर बाट स्कूल से की। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो चंबा आ गए और राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चंबा में 11वीं और 12वीं की पढ़ाई कॉमर्स स्ट्रीम से फर्स्ट डिवीजन से पूरी की। उसके बाद बीकॉम फर्स्ट ईयर पूरा हो चुका था और सेकंड ईयर अभी स्टार्ट किया था। तब तक अजय U-16 क्रिकेट में 2 नेशनल कैंप लगा चुके थे और अंडर-19 भी खेल कर आ चुके थे। अजय का अच्छा प्रदर्शन देखते हुए उन्हें सीनियर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट कैंप के लिए भी चयनित  कर लिया गया था। कैंप के बाद अजय का अंडर-19 डेज मैच के लिए चयन हो गया उसके बाद ऊना और हमीरपुर में मैच खेल कर चंबा वापस लौटे ही थे। तभी ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था और 2 अगस्त 2017 को अपनी रेहड़ी को पानी से बचाते हुए हाई वोल्टेज की तार ने 5 फुट दूर से ही अपनी चपेट में ले लिया अजय वही पर बिहोश हो जाते है  और 11 हजार केवी का करंट लगने से अजय का बच पाना बहुत ही मुश्किल था। अजय लगभग 9 दिन तक क्षेत्रीय अस्पताल चंबा के आईसीयू वार्ड में कोमा में रहे थे डॉक्टर की तरफ से साफ मना कर दिया गया था कि अब भगवान ही बचा सकते है। हमारे हाथ में कुछ नही बचा है। बच भी गए तो इनकी टांग काटना ही पड़ेगी। अजय 10 में दिन जाकर कोमा से बाहर आते है। लेकिन उन्हें कुछ भी पता नहीं था कि उनके साथ क्या हुआ है शरीर में हर जगह घाव ही घाव थे। अजय का शरीर काम नहीं कर रहा था, करंट लगने से सारा खून लगभग खत्म हो चुका था। अजय के होश में आने से परिवार ने थोड़ी राहत की सांस ली। और उसके बाद उसी दिन अजय के बड़े भाई नितिन और जीजू नबू शर्मा उसको टांडा ले गए। टांडा में अजय का 2 दिन तक इलाज चला लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया टांग बचाने से लेकिन बड़े भाई नितिन शर्मा ने हार नहीं मानी और 15 अगस्त को पीजीआई चंडीगढ़ ले गए। वहां पर अजय के लगभग 8 ऑपरेशन होने के बाद अजय की टांग बचा ली गई। अजय बताते है कि मेरे सभी ऑपरेशन का खर्चा लगभग 15 लाख रुपए हो चुका है। मेरे भाई ने मेरे इलाज के लिए लोगों से उधार और बैंक से लोन लेकर मेरा पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज करवाया है और अभी तक मेरे 2 मेजर ऑपरेशन होने बाकी है। जिसका खर्चा लगभग 5 लाख रुपए है। लेकिन परिवार के पास अब इलाज के लिए कोई पैसा नहीं बचा है। जो पैसा था वो सारा इलाज पर खर्च हो चुका है। अजय बताते है कि डीसी सुदेश मोख्त्ता नगर परिषद चंबा और बिजली बोर्ड की गलती व लापरवाही की वजह से वो इस हादसे का शिकार हुए थे। उनकी वजह से में जीवन भर के लिए अपाहिज हो गया। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मेरी जान बचाई मुझे नया जन्म मिला सिर्फ मेरे परिवार की वजह से। लेकिन मेरे भाई के उपर लाखों रुपए का कर्जा पड़ गया। अजय ने बताया कि हर तीसरे महीने उनके ऑपरेशन पीजीआई चंडीगढ़ में होते रहते थे। कभी सर्जरी में इन्फेक्शन हो जाता था तो कभी स्वेलिंग आ जाती थी। केयर कर पाना बहुत ज्यादा मुश्किल था और ये लगभग 3 साल तक ऐसा ही चलता रहा। उसके बाद धीरे धीरे अपने पैरों पर चलना शुरू कर दिया। शुरुआत में बहुत सारी परेशानियां, दुख, दर्द, तकलीफें,आई लेकिन उसके बावजूद भी अजय ने हिम्मत नहीं हारी और बड़े भाई के मार्गदर्शन से आगे बढ़ते चले गए। और अजय अब तक 5 नेशनल क्रिकेट में खेल चुके हैं कोच नरिंदर धवन और रवि चौहान के मार्गदर्शन से और दो पैरा स्पोर्ट्स में खेल चुके हैं कोच ललित ठाकुर की मेहनत, प्रयास और मार्गदर्शन से अजय राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई गोल्ड और सिल्वर मेडल भी हासिल कर चुके है। चाहे वह खेल विभाग की तरफ से प्रतियोगिता हो चाहे वह पैरा स्पोर्ट्स की तरफ से हो, अजय ने हमेशा ही चंबा के लिए खेलों में अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अजय का इंटरनेशनल के लिए सिलेक्शन होने पर गांव शहर और प्रदेश में खुशी का माहौल है। अजय चंबा से पहले खिलाड़ी बन गए हैं जिनका चयन भारतीय वालीबॉल टीम में हुआ है। अजय अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने चंबा प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। हाल ही में हुए नेशनल पैरा सेटिंग वालीबॉल टीम में अजय को उप कप्तान की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। और उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए हिमाचल को कई मैच जिताए और क्वार्टरफाइनल तक पहुंचाया। और चयनकर्ताओं की नज़रों में अपनी कप्तानी की एक नई मिसाल पेश की अजय ने इस उपलब्धि का सारा श्रेय बड़े भाई नितिन शर्मा, मुख्य  कोच ललित ठाकुर,और जीतेश्वर दत्ता के साथ साथ अपने माता-पिता को दिया है। अजय बताते है की उनका यहाँ तक पहुंचना कोई आसान नहीं था। उनको भी जिंदगी में कई चैलेंज आए और उन्होंने उन सभी  चैलेंजो का डटकर सामना किया और लगातार मेंहनत करते रहे। अजय ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उनको 11 वर्ष की कड़ी मेहनत, लगन और कड़े संघर्षों  का सामना करना पड़ा। अजय ने बताया की मेरे लिए भी यहां तक पहुंचना कोई इतना आसान काम नहीं था। कई बार निराशा हाथ में लगी और कई बार सब कुछ छोड़ने का मन किया। लेकिन कोच ललित ठाकुर और बड़े भाई की मदद से कुछ दिन के बाद फिर से अभ्यास शुरू कर देते था। तभी जाके अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित होना वाला जिले का पहला  खिलाड़ी बन पाया हूं।

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