दीपांशु शर्मा हरिपुरधार।
सिरमौर जिला भाजपा प्रवक्ता मेलाराम शर्मा ने हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार पर हरिपुरधार डिग्री कॉलेज को सुनियोजित तरीके से बंद करने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने कॉलेज में संचालित चार विषयों को बंद किया और अब 31 जुलाई को जारी आदेशों के तहत कॉलेज के चार सहायक प्रोफेसरों का तबादला संगड़ाह कॉलेज कर दिया गया, जबकि उनकी जगह किसी नए प्राध्यापक की नियुक्ति नहीं की गई।मेलाराम शर्मा ने बताया कि डिग्री कॉलेज हरिपुरधार में कुल सात स्वीकृत पद हैं। चार प्राध्यापकों के स्थानांतरण के बाद अब कॉलेज में केवल तीन प्रोफेसर ही शेष रह गए हैं। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय में सैकड़ों विद्यार्थी, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में चार विषयों के बंद होने और शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों की कमी के चलते बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को नाहन, सोलन अथवा अन्य महाविद्यालयों की ओर पलायन करना पड़ेगा। इससे कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या कम होगी और बाद में सरकार कम नामांकन का हवाला देकर इस महाविद्यालय को बंद करने का प्रयास कर सकती है।भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हरिपुरधार जैसे दुर्गम और पिछड़े क्षेत्र में यह महाविद्यालय तत्कालीन प्रो. प्रेम कुमार धूमल सरकार के कार्यकाल में इस उद्देश्य से खोला गया था कि क्षेत्र के युवाओं, विशेषकर छात्राओं, को घर के समीप उच्च शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार इस उद्देश्य को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।मेलाराम शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने सत्ता में आते ही हरिपुरधार सिविल अस्पताल, संगड़ाह विद्युत डिवीजन, विद्युत उपमंडल, पटवार सर्कल सैल और अरट हेल्थ सब सेंटर सहित कई संस्थानों को बंद किया और अब हरिपुरधार डिग्री कॉलेज के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा कर दिया है।उन्होंने क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं से आग्रह किया कि वे स्थानीय विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के माध्यम से मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करवाकर स्थानांतरित प्राध्यापकों के स्थान पर नए शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करें, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।भाजपा प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हरिपुरधार कॉलेज के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं रोका गया, तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।