केलांग ( रंजीत लाहौली , संवाददाता ),
लाहौल के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना से मुलाकात कर आगामी मानसून सीजन और वर्तमान कृषि उत्पादन अवधि के मद्देनजर किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और चिंताओं को उनके समक्ष रखा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जिले में सब्जियों, नकदी फसलों तथा फूलों की फसल कटाई और विपणन का समय निकट है। ऐसे में पिछले वर्षों के आपदा के अनुभवों तथा वर्तमान में जाहलमा नाला की मौजूदा स्थिति को देखते हुए किसानों में अपनी उपज को समय पर मंडियों तक पहुंचाने को लेकर चिंता बनी हुई है।
किसानों ने प्रशासन से आग्रह किया कि मानसून अथवा किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कृषि उपज के निर्बाध परिवहन के लिए पूर्व से ही प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों की मेहनत से तैयार फसल को नुकसान न पहुंचे और उसे समय पर बाजार उपलब्ध हो सके।
उपायुक्त किरण भड़ाना ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जिला प्रशासन इस विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है तथा किसानों की उपज को सुरक्षित एवं समयबद्ध रूप से बाजारों तक पहुंचाने के लिए बहु-आयामी रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने जिला कृषि अधिकारी एवं उपनिदेशक बागवानी को इस संदर्भ में आवश्यक निर्देश दिए और किसानों के उत्पादों को समय पर पहुंचाने के लिए उनके साथ निरंतर सहयोग करने के निर्देश दिए ।उन्होंने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों में लेह एवं काजा मार्गों सहित वैकल्पिक परिवहन मार्गों की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लेह में कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के उपयोग के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) की प्रक्रिया भी प्रगति पर है, जिससे किसानों को अपनी उपज के भंडारण में सुविधा मिल सके।
उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के संरक्षण एवं मूल्य संवर्धन के लिए किसानों को सोलर ड्रायर जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है। साथ ही लेह और कारगिल में वैकल्पिक बाजारों की उपलब्धता और विपणन संभावनाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है, ताकि आपदा अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में किसानों को वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध रह सकें।
उपायुक्त ने कहा कि यदि किसी आपदा की स्थिति उत्पन्न होती है तो यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए लेह एवं पदुम प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर भारी वाहनों, विशेषकर ट्रकों एवं टैंकरों की आवाजाही को नियंत्रित करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिससे आवश्यक सेवाओं तथा कृषि उपज के परिवहन को प्राथमिकता दी जा सके।
बैठक के दौरान किसानों ने कृषि कार्यों के लिए आवश्यक डीजल एवं अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। इसके अतिरिक्त जाहलमा नाला एवं लिंडूर गाँव के बचाव,जाहलमा नाला पर पैदल पुल के निर्माण, जोबरंग सड़क एवं पुल से जुड़े लंबित मामलों तथा जोबरंग पुल के समीप ड्रेजिंग प्वाइंट से संबंधित मुद्दों को भी विस्तार से उठाया गया।
इसके अतिरिक्त मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण पर भी चिंता व्यक्त की तथा मानसून अवधि के दौरान शून्य मलबा डंपिंग (जीरो मक्क डंपिंग) नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। निर्माण एजेंसियों द्वारा मलबे का निस्तारण केवल चिन्हित एवं स्वीकृत स्थलों पर ही किया जाना चाहिए तथा इसकी नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की सुरक्षा तथा उनकी उपज के निर्बाध परिवहन और विपणन को सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन हरसंभव प्रयास करेगा।बैठक में पुलिस अधीक्षक शिवानी मेहला, एसडीएम कुनिका एकर्स, डीएफओ इंद्रजीत सीरा,बीडीओ डॉ विवेक गुलेरिया, अधिशासी अभियंता जल शक्ति विभाग अजय गुप्ता,उपनिदेशक बागवानी विभाग मीनाक्षी शर्मा, जिला कृषि अधिकारी चौधरी राम,एसडीओ लोक निर्माण विभाग सहित एनी अधिकारी एवं ज़िला के किसान उपस्थित रहे ।
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