ब्यूरो रिपोर्ट,
2000 मेगावाट सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की प्रथम इकाई (250 मेगावाट, इकाई संख्या-2) के वाणिज्यिक प्रचालन की घोषणा के अवसर पर माननीय केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल। इस अवसर पर सचिव (विद्युत) पंकज अग्रवाल; संयुक्त सचिव (हाइड्रो) मोहम्मद अफजल; एनएचपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेन्द्र गुप्ता; निदेशक (कार्मिक) उत्तम लाल; निदेशक (परियोजनाएं) संजय कुमार सिंह; निदेशक (तकनीकी) सुप्रकाश अधिकारी; निदेशक (वित्त) महेश कुमार शर्मा तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी संतोष कुमार उपस्थित थे।
भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित करते हुए, भारत सरकार के नियंत्रणाधीन “नवरत्न” उद्यम, एनएचपीसी लिमिटेड ने अरुणाचल प्रदेश/असम सीमा पर स्थित 2000 मेगावाट (8 x 250 मेगावाट) सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की पहली यूनिट (250 मेगावाट की यूनिट सं. 2) के वाणिज्यिक प्रचालन की तिथि (सीओडी) घोषित की है। भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना को चालू करने में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, 23 दिसंबर, 2025 को इस यूनिट का वाणिज्यिक प्रचालन सफलतापूर्वक शुरू किया गया है ।
माननीय केंद्रीय विद्युत, आवासन और शहरी कार्य मंत्री, मनोहर लाल ने 23 दिसंबर 2025 को वर्चुअल मोड के माध्यम से 2000 मेगावाट (8×250 मेगावाट) सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना की यूनिट-2 (250 मेगावाट) के वाणिज्यिक प्रचालन का शुभारंभ किया, जो परियोजना की प्रगति में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मंत्री ने एनएचपीसी की विकास यात्रा में अर्जित इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस यूनिट का चालू होना “न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि वर्षों की कड़ी मेहनत, समर्पण और टीम वर्क का प्रमाण है।” उन्होंने प्रमुखता से कहा कि सुबनसिरी परियोजना स्वच्छ और संधारणीय ऊर्जा के लिए भारत की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में पूर्वोत्तर भारत के विकास में सहायता व राष्ट्रीय ग्रिड को सुदृढ़ता प्रदान करेगी और भारत के महत्वाकांक्षी नेट जीरो लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगी ।
पंकज अग्रवाल, सचिव (विद्युत); मो. अफजल, संयुक्त सचिव (हाइड्रो) के साथ भूपेन्द्र गुप्ता,अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी; उत्तम लाल, निदेशक (कार्मिक); संजय कुमार सिंह, निदेशक (परियोजनाएं); सुप्रकाश अधिकारी, निदेशक (तकनीकी); महेश कुमार शर्मा, निदेशक (वित्त) और संतोष कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी ने उपस्थित होकर इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई ।
पंकज अग्रवाल, सचिव (विद्युत) ने एनएचपीसी की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि सुबनसिरी लोअर परियोजना से पूर्वोत्तर में ऊर्जा आपूर्ति में काफी सुधार होगा और यह परियोजना अत्याधुनिक, संधारणीय ऊर्जा प्रणालियों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में कार्य करेगी। अग्रवाल ने शेष यूनिटों को समय पर चालू करने पर बल देते हुए कहा कि सुबनसिरी परियोजना स्थानीय समुदायों के लिए पर्याप्त सामाजिक-आर्थिक लाभ प्रदान करने के साथ नेट जीरो ऊर्जा भविष्य के लिए भारत की इनर्जी ट्रांजिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।
भूपेन्द्र गुप्ता,अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी ने इस उपलब्धि को संभव बनाने में विद्युत मंत्रालय, अरुणाचल प्रदेश और असम की राज्य सरकारों, पूर्व एनएचपीसी नेतृत्व, सुबनसिरी परियोजना की पूरी टीम, सभी प्रमुख हितधारकों और भागीदारों के प्रति उनके समर्पित सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय ग्रिड को सुदृढ़ करने व पूर्वोत्तर के सतत विकास में सहयोग प्रदान करेगी और विद्युत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान करेगी। राजेन्द्र प्रसाद, कार्यपालक निदेशक एवं सुबनसिरी लोअर परियोजना प्रमुख ने कहा कि परियोजना टीम निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजना की शेष इकाइयों के सफल कमीशनिंग हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्यरत है।
यूनिट 2 के चालू होने के साथ, परियोजना शीघ्र ही 250 मेगावाट की 3 और यूनिटों को चालू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, तत्पश्चात वर्ष 2026-27 के दौरान शेष चार यूनिटों को चरणबद्ध तरीके से चालू किया जाएगा । पूरी परियोजना चालू होने पर, 2000 मेगावाट की सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए राष्ट्रीय ग्रिड में लचीलेपन को बढ़ाएगी और बड़े स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा योगदान में एक नए युग में प्रवेश करेगी।
भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना के रूप में, सुबनसिरी लोअर परियोजना में 250 मेगावाट की 8 इकाईयाँ हैं और आठ हेड रेस टनलों (एचआरटी) के माध्यम से पानी को डायवर्ट करते हुए इसे छोटे पोंडेज के साथ रन-ऑफ-द-रिवर स्कीम के रूप में डिज़ाइन किया गया है। यह परियोजना भारत के हरित ऊर्जा भविष्य के लिए वार्षिक 7,422 मिलियन यूनिट (एमयू) नवीकरणीय विद्युत उत्पन्न करेगी। इस परियोजना में 116 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बाँध है, जो पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा बाँध है। यह बाँध न केवल क्षेत्रीय अवसंरचना और ग्रिड लचीलेपन को सुदृढ़ करता है, बल्कि सुबनसिरी नदी बेसिन में बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन में भी सहायक है।
सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और दृढ़ संकल्प का एक शानदार प्रतिमान है, जिसमें भारत के सबसे भारी हाइड्रो जनरेटर रोटर, सबसे बड़े स्टेटर और सबसे बड़े मुख्य इनलेट वाल्व लगाए गए हैं। इस परियोजना में देश के सबसे बड़े एग्रीगेट प्रोसेसिंग प्लांटों, उच्चतम क्षमता वाले बैचिंग प्लांट और भारत में बाँध कंक्रीटिंग के लिए पहली बार उपयोग किए गए रोटेक टॉवर बेल्ट सहित अग्रणी निर्माण नवाचारों को भी शामिल किया गया है, जो बड़े पैमाने पर जलविद्युत विकास में तकनीकी प्रगति के लिए एनएचपीसी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना, सुबनसिरी नदी पर कैस्केडेड बांधों की श्रृंखला में पहली परियोजना है तथा यह बाढ़ नियंत्रण एवं प्रवाह संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह परियोजना मानसून के दौरान सुरक्षित प्रबंधन के लिए समर्पित 442 मिलियन क्यूबिक मीटर बाढ़ कुशन प्रदान करती है। पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल) पर 1,365 मिलियन क्यूबिक मीटर के सकल जलाशय भंडारण के साथ, परियोजना यह सुनिश्चित करती है कि बाढ़ की अवधि के दौरान लगभग एक तिहाई जलाशय खाली रहे, जिससे यह अतिरिक्त बाढ़ के पानी को एकत्रित करने और डाउनस्ट्रीम में निवास कर रहे समुदायों की रक्षा करने में सक्षम हो सके।
एनएचपीसी ने सुबनसिरी नदी के किनारे विस्तृत नदी तट संरक्षण और कटाव नियंत्रण उपायों को लागू किया है, जिसमें डाउनस्ट्रीम में 30 किमी तक संरक्षण कार्यों को पूरा किया है और लगभग 522 करोड़ रुपए के निवेश के साथ इस कार्य को 60 किमी तक आगे किया जाना है। इन उपायों ने नदी तटों को पांच साल से अधिक समय के लिए प्रभावी ढंग से स्थायीकृत कर दिया है। इसके अतिरिक्त, एनएचपीसी आईआरएमए के साथ मिलकर डाउनस्ट्रीम में निवास कर रहे समुदायों के विकास के लिए सुअर पालन, रेशम उत्पादन और हथकरघा आदि आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी सहायता कर रही है। ये विकासात्मक पहलें, अब चालू हैं, लगभग 5,000 महिला किसानों को लाभान्वित करती हैं और क्षेत्र में संधारणीय सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं।
पूरे भारत में 16 लाभार्थी राज्यों को विद्युत आपूर्ति के अतिरिक्त, सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना अरुणाचल प्रदेश और असम को निःशुल्क विद्युत आवंटन प्रदान करेगी, जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र को परियोजना से 1,000 मेगावाट विद्युत प्राप्त होगी, जो क्षेत्रीय ऊर्जा उपलब्धता को काफी सुदृढ़ करेगी।
परियोजना के निर्माण चरण के दौरान प्रतिदिन लगभग 7,000 स्थानीय लोगों को नियोजित करके और संविदाकारों, सेवा प्रदाताओं और स्थानीय बाजारों के माध्यम से कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का निर्माण हुआ है जिससे क्षेत्रीय स्तर पर सुदृढ़ सामाजिक-आर्थिक लाभ हुए हैं। परियोजना के चालू होने और विद्युत की निरंतर उपलब्धता के साथ, नए लघु उद्योगों के शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आप्रवासन को कम करने में मदद करते हुए रोजगार और व्यावसायिक अवसरों का विस्तार होगा। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से पर्यटन को बढ़ावा मिलने और रिवर नेविगेशन में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे दीर्घकालिक क्षेत्रीय विकास और समृद्धि में योगदान मिलेगा।
एनएचपीसी ने अरुणाचल प्रदेश और असम में सीएसआर पहलों में लगभग 155 करोड़ रुपए का निवेश किया है। प्रमुख कार्यों में स्वच्छ विद्यालय अभियान के अंतर्गत 3,129 शौचालयों का निर्माण, डोलुंगमुख में 250 छात्रों के लिए विवेकानंद केंद्र विद्यालय की स्थापना, 1,841 स्थानों पर सुरक्षित पेयजल सुविधाएं प्रदान करना और 9 स्थानों पर स्वच्छ आरओ पानी प्रदान करना और सामुदायिक हॉल, मीटिंग हॉल, कॉजवे और आसपास के क्षेत्रों में जल आपूर्ति योजनाओं जैसी कई ग्रामीण विकास परियोजनाओं को निष्पादित किया गया है।
पिछले पांच दशकों में, एनएचपीसी ने कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित किया है। एनएचपीसी 100% हरित ऊर्जा कंपनी के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करते हुए सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन में विविधिकरण किया है। प्रचालनरत 30 पावर स्टेशनों से 8333 मेगावाट की संस्थापित क्षमता और वर्तमान में निर्माणाधीन 9704 मेगावाट की 14 परियोजनाओं के साथ, एनएचपीसी भारत के स्वच्छ ऊर्जा ट्रांजिशन को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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