शिमला (विकास शर्मा, ब्यूरो चीफ),
शिमला के आईजीएमसी में शनिवार को स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन हिमाचल प्रदेश की ओर से कर्मचारियों को अंगदान के महत्व में बताया गया। आईसी कंसलटेंट रामेश्वरी और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार ने पंपलेट बांटकर कर्मचारियों को अंगदान और नेत्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि व्यक्ति जीते जी और करने के बाद अंगदान कर सकता है। एक व्यक्ति ब्रेन डेड स्थिति में अंगदान करके आठ अलग-अलग लोगों की जिंदगी बचा सकता है। उन्होंने बताया कि मरने के बाद नेत्रदान करके दूसरों के जीवन में उजाला लाया जा सकता है। उन्होनें बताया कि वहीं अंगदान एक नया जीवनदान है।
एक व्यक्ति जिसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष हो वह स्वैच्छिक रूप से अपने करीबी रिश्तेदारों को देश के कानून और नियमों के दायरे में रहकर अंगदान कर सकता है और अंगदान करने की शपथ ले सकता है। अंगदान से संबंधित सही जानकारी वह भ्रम होने की वजह से अधिकतर लोग अंगदान करने से पीछे हट जाते हैं । इसीलिए अगर लोगों में पहले से अंगदान को लेकर पर्याप्त जानकारी होगी तभी ऐसे मौके जरूरतमंदों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं। सोटो हिमाचल की ऑफिशल वेबसाइट www.sotto himachal.in के तहत अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे बैठे अंगदान करने के लिए शपथ पत्र भर सकता है। वेबसाइट पर क्यू आर कोड स्कैन कर रजिस्ट्रेशन की औपचारिकता पूरी करते हुए व्यक्ति अंगदान की इच्छा जाहिर कर सकता है। यह प्रक्रिया आधार लिंक होगी। मौजूदा समय में प्रदेश भर से करीब 1500 से अधिक लोगों ने अंगदान का शपथ पत्र भरा है।
उन्होंने बताया कि अंगदान जीवित व मृत दोनों परिस्थितियों में किया जा सकता है। जीवित रहते अंगदान में व्यक्ति नजदीकी रिश्तेदार को किडनी, पेनक्रियाज व लीवर का एक भाग दान कर सकता है। वही ब्रेन डेड स्थिति में व्यक्ति अपने आठ अंग दान करके जरूरतमंद मरीजों का जीवन बचा सकता है। उन्होंने बताया कि ब्रेन डेड की स्थिति कोमा से बिल्कुल अलग होती है इसमें शरीर वेंटीलेटर के जरिए काम कर रहा होता है और ब्रेन पूरी तरह से मृत हो चुका होता है। उन्होंने बताया कि साल 2023 तक देश भर में करीब 1037 लोगों ने अंगदान किया जबकि हर साल दर्जनों लोग अलग-अलग दुर्घटनाओं के कारण ब्रेन डेड होते हैं जो कि अंगदान के लिए सक्षम होते हैं। उन्होंने बताया कि हर साल 2 लाख मरीजों को किडनी की जरूरत होती है जबकि महज 10 हजार ट्रांसप्लांट हो पाते हैं। वहीं देश में हर साल 30 हजार व्यक्तियों को लीवर की जरूरत होती है जबकि 2 हजार ट्रांसप्लांट ही होते हैं। इसके अलावा प्रतिवर्ष 10 लाख लोगों को आंखों की जरूरत होती है लेकिन महज 50 हजार नेत्र ट्रांसप्लांट हो पाते हैं। देश में अंगदान व नेत्रदान के प्रति जागरूकता ना होने के कारण ऐसा हो रहा है। उन्होंने बताया कि अंगदान किसी भी जाति, धर्म, समुदाय, लिंग, व आयु के लोग कर सकते हैं।
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