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बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी

बिलासपुर,

जिला बिलासपुर में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के अंतर्गत बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। निदेशालय महिला एवं बाल विकास, हिमाचल प्रदेश के सौजन्य से जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देशन में सदर, घुमारवीं और झंडूता परियोजनाओं में ये प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) महिला बिलासपुर में 81 बालिकाओं को बेसिक कॉस्मेटोलॉजी (Basic Cosmetology) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे ब्यूटी और स्किन केयर क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकें। इसी प्रकार, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भराड़ी में बालिकाओं को ड्राइविंग स्किल (Driving Skill) का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर स्वरोजगार या परिवहन क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।

इसके अतिरिक्त, राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बिलासपुर में 24 बालिकाओं को बेसिक आईटी स्किल्स और एआई इनफॉर्मेशन (Basic IT Skills & AI Information) का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे डिजिटल तकनीकों में दक्षता हासिल कर ऑनलाइन रोजगार के अवसरों को भुना सकें।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा “बेटियां बने कूशल” अभियान के तहत विभिन्न पंचायतों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी बालिकाओं को विभिन्न क्षेत्रों में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बालिकाओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि उनके रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देना है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी हरीश मिश्रा ने बताया कि इस योजना के तहत जिले की सभी पंचायतों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्रिय रूप से जोड़ा गया है, ताकि अधिक से अधिक बालिकाएं इन कार्यक्रमों का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने और समाज में आत्मनिर्भरता के नए आयाम स्थापित करने में मदद करेगी।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल बालिकाओं को व्यावसायिक दक्षता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनकी आर्थिक भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक बालिकाएं इन कार्यक्रमों से लाभान्वित होकर विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकें। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बालिकाओं को आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकें।

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