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कुल्लू की डा. श्रुति मोरे भारद्वाज को मिला संत इश्वर सम्मान “

प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित देश के सबसे बड़े सेवा सम्मान “संत ईश्वर सम्मान” का भव्य समारोह संपन्न हुआ, गाँधी जयंती के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में सेवा भाव से कार्य करने वाले 17 साधकों को सम्मानित किया गया, जिनमें कला, साहित्य, पर्यावरण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को चुना गया था।

इस वर्ष कवि और समाजसेवी कुमार विश्वास को “संत ईश्वर विशेष सम्मान” से सम्मानित किया गया। उन्हीं के साथ कुल्लू जिला से संबंध रखने वाली डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज को भी इस प्रतिष्ठत संत इश्वर सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया! उन्हें यह सम्मान हिमाचल प्रदेश में प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early Intervention), विकलांगता क्षेत्र  (Disability sector) और भारत की पहली मोबाईल थैरेपी वैन के लिए (संत ईश्वर फाउंडेशन) द्वारा दिया गया! यह सम्मान जो उनके काम के प्रभाव के बारे में बहुत कुछ बताता है। उनकी यात्रा हमेशा आसान नहीं थी। शुरू में उनके भी अपने दोस्तों की तरह विदेश में काम करने और एक उज्ज्वल भविष्य सुरक्षित करने के बड़े सपने थे। लेकिन इसके बजाय, उसने कुल्लू लौटने का साहसी निर्णय लिया, तब भी जब उसके माता-पिता पूरी तरह से साथ नहीं थे। एक साइकिल यात्रा के दौरान जब वह पहली बार कुल्लू आई तो उनकी मुलाकात कुल्लू के एक गांव में पुराने घर में मासिक धर्म और विकलांगता से जूझ रही एक युवा विकलांग लड़की सोनाली से हुई जिसने उनके जीवन में सब कुछ बदल दिया!उसके बाद विदेश जाकर काम करने और बड़े शहर की चकाचौंध को छोड़कर उस अनुभव ने उन्हें जरूरतमंद बच्चों की मदद करने के उनके मिशन को प्रेरित किया। उन्होंने सबसे पहले एक स्थानीय एनजीओ के साथ काम किया, और इसके तुरंत बाद, उन्होंने संफिया फाउंडेशन की स्थापना की, जहां उन्होंने आश चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर-एन इनिशिएटिव ऑफ संफिया फाउंडेशन के प्रयासों का नेतृत्व किया – जिसका अर्थ है “सभी के लिए आशा।”  वह यहीं नहीं रुकी; वह हितधारकों के बीच जागरूकता पैदा कर रही है और यहां तक ​​कि भारत की पहली थेरेपी बस-थेरेपी ऑन व्हील्स भी लॉन्च की है, जो दूरदराज के इलाकों में बच्चों को आवश्यक देखभाल और सहायता प्रदान करती है। जल्द ही यह कार्यक्रम चंबा और लाहौल के दूरदराज के इलाकों में भी शुरू होने जा रहा है। उनके समर्पण ने न केवल कई उपेक्षित बच्चों का जीवन बदल दिया है बल्कि उनके परिवारों में भी एक आश का संचार किया है! देश के सुदूर हिस्से मुम्बई से आई लड़की 12 साल से इन बच्चों के साथ काम करते हुए जाने कब इन पहाड़ों की हो गई उसे पता भी नहीं लगा ! कुल्लू में ही शादी कर उन्होंने इन पहाड़ों को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया है!उनका एक छोटा सा परिवार है !उनके पति  हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय में प्राध्यापक है और उनके एक पुत्री और एक पुत्र है!

समारोह की विशेष उपस्थिति

इस भव्य समारोह में महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज, संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, कवि कुमार विश्वास जी,किरण लेखी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की विशेष उपस्थिति रही। इस अवसर पर संत ईश्वर फाउंडेशन ने “अहिंसा परम धर्मो” और “अहर्निशं सेवामहे” के सेवा भाव को चरितार्थ करते हुए समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा कर रहे व्यक्तियों को सम्मानित किया!

सम्मान समारोह में विशेष संबोधन

विशेष सम्मान से सम्मानित कवि कुमार बिश्वास ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा- “मेरे लिए सम्मानित होने का अवसर संकोच लाता है, दरअसल मेरा प्रारंभिक चेतना का उदय विद्रोह से हुआ परन्तु संत ईश्वर सम्मान द्वारा सम्मान्नित होना मेरे लिए गर्व की बात है। साथ ही धर्म को मानवता से जोड़ते हुए कुमार बिश्ववास ने राजधर्म के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा “जिस देश में धर्म राजधर्म से ऊपर होता है वो देश सर्वश्रेष्ट होता है जिसका उदहारण देश की संसद में संगोल का प्रतिष्ठित होना इस बात का साक्षात प्रमाण है।” महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा, “संत ईश्वर के प्रयास भारतीय परंपराओं और संस्कृति के सेवा भाव को जीवंत रखने का एक अनूठा प्रयास हैं।” उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति के सुदामा और शबरी जैसी परंपराओं से जोड़ते हुए कहा कि यह एक सफल प्रयोग है। केंद्रीय मंत्री किरन रिजुजू ने कहा- “ये आज के समय की बिडम्बना है की सकारात्मक कार्य करने वाले लोगो की पहचान तुलनात्मक रूप से सोशल मीडिया में उन लोगो के फॉलोवर ज्यादा है जो समाज में विपरीत रूप से प्रभावित करते है, मीडिया द्वारा भी इस दिशा में विचार करने की आवश्कता है। ऐसे में संत ईश्वर फाउंडेशन जैसी संस्था का प्रयास निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव लाएगा ऐसी मेरी अपेक्षा और शुभकामनाएं है। ”

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा, “संत ईश्वर जैसे कार्यक्रम में सम्मलित होना मेरे लिए निश्चित ही सौभाग्य की बात है परमात्मा के द्वारा दिया गया एक महत्वपूर्ण कर्म समाज सेवा है परन्तु भारत की सनातन धर्म जैसा दुनिया में और कोई भी राष्ट नहीं है जहाँ सेवा ही धर्म है ” संस्था के अध्यक्ष कपिल खन्ना ने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए बताया कि अब तक संत ईश्वर फाउंडेशन 120 से अधिक व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित कर चुका है, जिनमें से 6 व्यक्तियों को बाद में भारत सरकार ने पद्म पुरस्कार से भी नवाजा है। उन्होंने कहा कि संस्था का लक्ष्य समाज में गुमनाम रहकर निस्वार्थ सेवा करने वाले लोगों को मंच प्रदान करना है।

बता दें कि सम्पूर्ण भारतवर्ष में अभावग्रस्त और दुरूह प्रदेशों में समाज की सेवा के कार्य करने वाले व्यक्तियों/संस्थाओं का चयन करने वाली संत ईश्वर सम्मान समिति वर्ष 2015 से प्रारंभ हुए संत ईश्वर सम्मान द्वारा प्रति वर्ष ऐसे संगठनों एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है, जो समाज की नजरों से दूर निस्वार्थ भाव से समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं।”चार मुख्य श्रेणियों में सम्मान दिए गए, जिसमें जनजातीय, ग्रामीण विकास, महिला-बाल विकास और कला, साहित्य, पर्यावरण, स्वास्थ्य, और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साधक शामिल थे। सम्मान के अंतर्गत तीन श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए: 1 विशेष सेवा सम्मान, 4 विशिष्ट सेवा सम्मान, और 12 सेवा सम्मान। इन पुरस्कारों के अंतर्गत शॉल, ट्रॉफी, प्रमाण-पत्र, प्रतीक मुद्रा के साथ-साथ 5 लाख रुपये की नकद राशि विशेष सेवा सम्मान में, 1 लाख रुपये विशिष्ट सेवा सम्मान में और अन्य श्रेणियों में नकद राशि प्रदान की गई। इस समारोह में कुल 32 लाख रुपये की धनराशि वितरित की गई।

निर्णायक मंडल की भूमिका :

संत ईश्वर सम्मान के निर्णायक मंडल में प्रमुख रूप से श्री एस. गुरुमूर्ति डायरेक्टर RBI, श्री प्रमोद कोहली रिटायर्ड चीफ जस्टिस, जवाहर लाल कौल, पद्मश्री राम बहादुर राय, श्री पन्नालाल भंसाली और श्री गुणवंत कोठरी शामिल थे। हर वर्ष की भांति यह सभी मिलकर इन सेवा साधकों का चयन करते है और  उनकी सेवा भावना को पहचान देने का कार्य करते है।

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