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आईजीएमसी में मनाया नेत्रदान पखवाड़ा

शिमला, ब्यूरो : नेत्रदान में रेजिडेंट डॉक्टरों व नर्सिंग स्टॉफ का अहम रोल : डॉ सीता शिमला के आईजीएमसी में सोमवार को नेत्र दान पखवाड़े के तहत अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। यह पखवाड़ा 8 सितंबर तक चलेगा। कार्यक्रम में प्रधानाचार्या डॉ सीता ठाकुर मुख्यातिथि के रुप में उपस्थित रही। नेत्र दान में बेहतरीन सेवाएं प्रदान करने वाले स्टॉफ सदस्यों को सम्मानित किया गया। इसमें एनेस्थीसिया विभाग की डॉ दिव्या गर्ग, ग्रीफ काउंसलर डॉ सारिका, सोटो के ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर नरेश कुमार और स्टाफ नर्स ज्योति को सम्मानित किया गया। नेत्र रोग विभाग के अध्य्क्ष डॉ राम लाल शर्मा ने बताया कि विभाग के तहत अभी तक 422 नेत्र दान किए गए हैं, वहीं 358 नेत्र ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। मौजूदा समय तक 1260 लोगों ने करने के बाद नेत्रदान करने की शपथ ली है। उन्होंने बताया कि नेत्र बैंक की वेटिंग लिस्ट के आधार पर करीब 135 लोग नेत्र दान का इंतजार कर रहे हैं। नेत्रदान से संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए आई बैंक समय-समय पर जागरूकता अभियान चलता रहता है। इसके तहत अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर एलईडी स्क्रीन के जरिए लोगों को नेत्रदान संबंधी जरूरी जानकारी साझा की जा रही है। इसके अलावा अस्पताल के विभिन्न स्थानों पर बैनर और पोस्टर के माध्यम से भी जागरूकता फैलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि आईजीएमसी शिमला में प्रतिवर्ष 1500 से 2000 लोगों की मृत्यु होती है लेकिन महज 20 से 22 लोग नेत्रदान करते हैं यानी 1 प्रतिशत मरीज़ ही नेत्रदान करते हैं।कार्यक्रम में एसोसिएट प्रोफेसर व आई बैंक के नोडल अधिकारी डॉ विनय गुप्ता ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए बताया कि देश में हर साल विभिन्न बीमारियों और दुर्घटनाओं के कारण करीब 1 करोड़ लोगों की मृत्यु होती है जबकि महज 30,000 लोग आंखे दान करते हैं, जबकि 1 लाख लोगों को नेत्रदान की जरुरत रहती है। उन्होने बताया कि अंधविश्वास व विभिन्न भ्रांतियों के कारण लोग नेत्रदान करने से पीछे हट जाते हैं। पिछले दिनों नेत्र रोग विभाग की ओर से आयोजित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में डॉ आरुषि व डॉ दृष्टि ने पहला और डॉ अन्नया और डॉ अंशु ने दूसरा स्थान हासिल किया।कार्यक्रम के दौरान इन विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।इस दौरान नेत्ररोग विभाग की विशेषज्ञ डॉ आरती सरीन, डिप्टी एमएस डॉ अमन, डॉ साद रिजवी, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ शोमीन धीमान, डॉ अभिषेक, सेवादासी व रमेश मौजूद रहे।

रक्तदान में रेजिडेंट डॉक्टरों व नर्सिंग स्टॉफ का अहम रोल : डॉ सीता आईजीएमसी प्रधानाचार्या डॉ सीता ठाकुर ने बताया कि नेत्रदान में रेसिडेंट डाक्टरों व नर्सिंग स्टॉफ की अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होने कहा कि डॉक्टरों व नर्सों का मरीज़ व तीमारदारों के साथ भावनात्मक रिश्ता बन जाता है। इससे मृत्यु के बाद मरीजों के तीमारदारों को नेत्रदान के लिए सहमत करवाना आसान हो सकता है।

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