राजगढ़ (पवन तोमर/ब्यूरो चीफ),
इटरनल यूनिवर्सिटी में आज 10वें दीक्षांत समारोह का आयोजन धूमधाम से किया गया। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दविंदर सिंह तथा मुख्य अतिथि प्रोफेसर करमजीत सिंह, कुलपति जगत गुरु नानक देव पंजाब स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी पटियाला ने की | इटरनल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. दविंदर सिंह ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़कर दीक्षांत समारोह का शुभारंभ किया। इससे पहले शब्द कीर्तन का भी आयोजन किया गया। दीक्षांत समारोह में कुल 386 छात्रों को डिग्रीया प्रदान की गई, जिसमें 267 स्नातक एव 119 स्नातकोत्तर प्रोग्राम्स के लिए दी गई | 10 पीएचडी प्रोग्राम के लिए भी डॉक्टरेट की उपाधि दी गई | मास्टर स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धि की उपाधि जगनीत कौर, मास्टर ऑफ़ एजुकेशन व नैंसी बीएससी साइकोलॉजी ने स्नातक स्तर पर उपलब्धि हासिल की। विभिन्न विभागों में टॉपर रहने पर 13 छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जिसमें नैंसी बीएससी साइकोलॉजी, सूजन बीएससी एग्रीकल्चर, दिव्या लालवानी बी टेक फ़ूड टेक, अमनदीप कौर बीएड, जसकरण कौर बी टेक, वर्षा राणा, बीएससी नर्सिंग, कनिका गौतम एम पी एच, हरमनदीप कौर एमए म्यूजिक, नीलम देवी एम एस सी एग्रीकल्चर, मनीषा ठाकुर, बीएससी बेसिक साइंस, अच्छाडा उजलकौर, एमएससी साइंस, जगनीत कौर, एमए सोशल साइंस, याचना, एमएससी नर्सिग को मैडल दिए | इसके अतिरिक्त राइजिंग रिसर्चर अवार्ड के लिए तनवीर कौर पीएचडी स्कॉलर बायोटेक्नोलॉजी, रूबी देवी पीएचडी स्कॉलर बायोटेक्नोलॉजी, प्रीति पीएचडी स्कॉलर जीव विज्ञान को मैडल के साथ नवाजा गया | छात्रों को सलाह देते हुए मुख्य अतिथि प्रोफेसर करमजीत सिंह ने कहा कि जिस प्रकार तकनीकी क्षेत्र में बदलाव तेजी से होता है उसी प्रकार बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में भी देखे जा रहे है | इसलिए सभी छात्रों को सदैव अपडेट रहना चाहिए। नए विचारों के साथ नई सीख के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए नए क्षेत्रों में दिलचस्पी बढ़ानी चाहिए | अपने पाठ्यक्रम के साथ साथ अन्य पाठ्यक्रमों की जानकारी भी रखनी चाहिए। प्रत्येक छात्रों के सुनहरे भविष्य की कामना करते हुए डॉ. दविंदर सिंह ने कहा कि शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जिससे हम देश के विकास में सीधा योगदान देते है। आने वाले समय में विश्व स्तर पर अनेक अवसर प्राप्त होंगे और सभी छात्रों को उन अवसरों का सही लाभ उठाना आना चाहिए। अच्छा छात्र वही होता है जो अवसर का पूरा उपयोग करे और उसे हाथ से जाने न दे। डॉ. नीलम कौर ने कहा कि शिक्षा के साथ साथ मूल्यों का भी जीवन में अलग महत्व होता है इसलिए सभी छात्रों को अपने संस्कारों को कभी नहीं भूलना चाहिए | आज भारत को विश्व गुरू के रूप में जाना जाता है क्योंकि भारत अपनी संस्कृति, संस्कार, परंपरा के साथ जुड़ा है। देश का हर एक छात्र देश का स्तंभ है और यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि देश के विकास में योगदान दें।
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