भरमौर (महिंद्र पटियाल/संवाददाता),
ग्राम पंचायत गरोला में आज पंचायत सतर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत बैठक का आयोजन फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में किया गया जिसमें उक्त पंचायत में बने स्वयं सहायता समूह को आजीविका से जुड़े और महिलाओं को इसके लिए पंच सूत्र अथवा दशा सूत्र के बारे में बताया ताकि इन नियमों का पालन कर ग्रुप में होने वाली गतिविधियां को निरंतर कार्य करें। इसका उद्देश्य सभी ग्रामीण गरीब परिवारों पहुंचना और उन्हें स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। यह उनका पालन-पोषण तब तक करेगा जब तक वे गरीबी से बाहर नहीं आ जाते और जीवन की एक अच्छी गुणवत्ता का आनंद नहीं लेते। इसे प्राप्त करने के लिए एनआरएलएम विभिन्न स्तरों पर समर्पित और संवेदनशील समर्थन स्थापित करेगा। कोई व्यक्ति जीवन के विभिन्न कालाविधियों में जिस क्षेत्र में काम करता है या जो काम करता है, उसी को उसकी आजीविका रोजगार या कैरियर कहते हैं। विकासखंड से क्षेत्रीय समन्वयक संजय कुमार विकासखंड भरमौर ने बताया की आजीविका प्रायः ऐसे कार्यों को कहते हैं जिससे जीविकोपार्जन हो कलाकार आदि कुछ आजीविकाएँ हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे अचार, पापड़, बड़ी, दलिया, आटा, अगरबत्ती, मुरब्बा राज मांह अखरोट इत्यादि की सुगम उपलब्धता से महिलाओं व बच्चों के पोषण तथा विकास में महत्वपूर्ण योगदान करें। ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में होने वाले पलायन को रोकने में सहायक। स्वैच्छिक बचत और वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहन। स्वयं सहायता समूह का लक्ष्य गरीब लोगों के बीच नेतृत्व क्षमता का विकास करना, स्कूली शिक्षा में योगदान करना, पोषण में सुधार करना, मुख्य रूप से महिलाओं को स्वतंत्र बनाने की प्रथा को सदंर्भित करता है ताकि वे स्वयं निर्णय ले सकें और साथ ही बिना किसी पारिवारिक या सामाजिक प्रतिबंध के अपने जीवन को संभाल सकें। सरल शब्दों में, यह महिलाओं को अपने स्वयं के व्यक्तिगत विकास की जिम्मेदारी लेने का अधिकार देता है। बाल विकास परियोजना अधिकारी भरमौर ने महिलाओं को बताया की महिला सशक्तिकरण को बेहद आसान शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है कि इससे महिलाएँ शक्तिशाली बनती है जिससे वो अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकती है व दूसरे शब्दों में– महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा, आर्थिक तरक्की के बराबरी के मौके मिल सके, जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता और तरक्की प्राप्त कर सके। यह वह तरीका है, जिसके द्वारा महिलाएँ भी पुरुषों की तरह अपनी हर आकंक्षाओं को पूरा कर सके।महिला सशक्तिकरण में ये ताकत है कि वो समाज और देश में बहुत कुछ बदल सकें। वो समाज में किसी समस्या को पुरुषों से बेहतर ढ़ंग से निपट सकती है। वो देश और परिवार के लिये अधिक जनसंख्या के नुकसान को अच्छी तरह से समझ सकती है। सरकार इस योजना के माध्यम से महिलाओं के साथ होने वाले घरेलू हिंसा को रोकने के लिए और महिलाओं की मदद के लिए शुरू किये हैं। बैठक में आंगनवाड़ी सुपरवाइजर आशा वर्कर वार्ड मेंबर और पूर्व चेयरमैन नीलम ठाकुर भरमौर ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
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