40 साल बाद बड़ा देव कमरूनाग के दरबार पहुंचे देव बालाटिका लेह, सराज घाटी में आस्था का महासंगम

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ब्यूरो रिपोर्ट।

मंडी जिले की सराज घाटी में इन दिनों प्राचीन देव परंपरा और लोक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। घाटी के आराध्य देव बालाटिका लेह लगभग 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बड़ा देव कमरूनाग के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए रवाना हुए हैं। चार दिनों तक चलने वाली इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक यात्रा को लेकर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का माहौल बना हुआ है।
देव बालाटिका लेह के गूर ज्ञाने राम ठाकुर ने बताया कि यह पवित्र देव यात्रा 2 अगस्त से शुरू होकर 5 अगस्त तक चलेगी। रविवार सुबह देव बालाटिका का भव्य रथ अपनी मूल स्थली लेह कोठी से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रवाना हुआ। इस दौरान करीब 250 देवलू और बड़ी संख्या में श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों व देव धुनों के बीच जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल हुए।
इस यात्रा का सबसे प्रमुख आकर्षण देव बालाटिका लेह और बड़ा देव कमरूनाग का ऐतिहासिक मिलन रहेगा। देव बालाटिका कमरूनाग मंदिर पहुंचकर शीश नवाएंगे तथा पवित्र झील में स्नान कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करेंगे। गूर ज्ञाने राम ठाकुर के अनुसार 4 अगस्त को कमरूनाग मंदिर परिसर में सभी धार्मिक अनुष्ठान और देव परंपराएं विधिवत संपन्न की जाएंगी, जिसके बाद वापसी यात्रा आरंभ होगी।
देव बालाटिका का रथ 5 अगस्त को सुबह लगभग 11 बजे लेह कोठी लौटेगा। करीब चार दशक बाद इस ऐतिहासिक यात्रा की वापसी पर देवता का भव्य स्वागत किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धाम का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
40 वर्षों बाद आयोजित हो रही इस देव यात्रा को सराज घाटी की प्राचीन देव संस्कृति और लोक आस्था के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।

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