ब्यूरो रिपोर्ट।
शिमला: गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक बार फिर नया कर्ज लेने का फैसला किया है। सरकार अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए 700 करोड़ रुपये का ऋण लेगी। यह राशि 5 अगस्त को राज्य सरकार के खाते में जमा होगी। इसके साथ ही प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 1,12,600 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा।वित्त विभाग के अनुसार, 700 करोड़ रुपये का यह ऋण दो अलग-अलग अवधियों के लिए लिया जा रहा है। इसमें 400 करोड़ रुपये 18 वर्ष की अवधि के लिए होंगे, जिसकी अदायगी 24 जून 2044 तक ब्याज सहित की जाएगी। वहीं, 300 करोड़ रुपये 23 वर्ष की अवधि के लिए लिए जाएंगे, जिन्हें 24 जून 2049 तक ब्याज सहित लौटाया जाएगा।सरकार पर हर महीने वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज की अदायगी का भारी वित्तीय दबाव बना हुआ है। प्रदेश को प्रतिबद्ध देनदारियों के भुगतान के लिए हर माह करीब 2,800 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ती है। इसमें लगभग 2,000 करोड़ रुपये कर्मचारियों के वेतन, 800 करोड़ रुपये पेंशन, 500 करोड़ रुपये पुराने कर्ज के ब्याज और करीब 300 करोड़ रुपये मूलधन चुकाने पर खर्च होते हैं।राजस्व के सीमित स्रोतों और लगातार बढ़ते खर्चों के बीच सरकार को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नियमित रूप से कर्ज लेना पड़ रहा है। ऐसे में नया ऋण प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और बढ़ते वित्तीय दबाव को एक बार फिर उजागर करता है।