दलबदल पर सख्त वार: अयोग्य विधायकों की पेंशन बंद, ‘चिट्टा’ आरोपियों की पंचायत चुनाव में एंट्री भी बैन

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ब्यूरो रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश में दलबदल करने वाले विधायकों पर सख्ती बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित किए गए विधायकों को अब पेंशन से भी वंचित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया।
प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम की धारा 6-बी में बदलाव किया जाएगा। इसमें स्पष्ट किया गया है कि 14वीं विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित कोई भी सदस्य यदि दलबदल के कारण अयोग्य घोषित होता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा कानून में दलबदल को हतोत्साहित करने का कोई ठोस प्रावधान नहीं था, जिसे अब इस संशोधन के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य जनादेश की रक्षा करना, लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखना और संवैधानिक उल्लंघनों पर रोक लगाना है।
वहीं, विधानसभा में एक अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किया गया। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट के गंभीर मामलों में आरोप तय होने वाले व्यक्तियों को पंचायत चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है। खासतौर पर ‘चिट्टा’ या हेरोइन तस्करी से जुड़े मामलों में आरोपित लोगों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने की व्यवस्था की जा रही है।
सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद पंचायती राज संस्थाओं में आपराधिक तत्वों की एंट्री को रोकना और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की पवित्रता को बनाए रखना है।

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