300 यूनिट फ्री का वादा बदला, अब 126 यूनिट के बाद झटका

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ब्यूरो रिपोर्ट।

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने बिजली सब्सिडी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की चुनावी गारंटी के बीच अब 126 यूनिट से अधिक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी समाप्त कर दी गई है। नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गई है।
पहले 126 से 300 यूनिट तक उपभोक्ताओं को 1.73 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी मिलती थी, जिससे प्रभावी दर 4.17 रुपये प्रति यूनिट पड़ती थी। अब 126 यूनिट से अधिक खपत पर सीधे 5.89 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल जारी होंगे। इसके साथ ही 85 रुपये प्रतिमाह फिक्स चार्ज भी देना होगा।
125 यूनिट तक ही मुफ्त बिजली
नई व्यवस्था के तहत अब केवल 0 से 125 यूनिट तक बिजली निशुल्क मिलेगी। यह लाभ अधिकतम दो घरेलू मीटरों पर ही दिया जाएगा। इसके लिए उपभोक्ताओं को अपने बिजली मीटर को राशन कार्ड से लिंक करवाना अनिवार्य होगा।
दो से अधिक मीटर रखने वाले उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक भी 5.44 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल देना होगा। वहीं 126 यूनिट से अधिक खपत होने पर पूरे उपभोग पर 5.89 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल जारी किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक राशन कार्ड पर केवल दो मीटरों को ही सब्सिडी के दायरे में रखा जाएगा।
अति गरीब परिवारों को बड़ी राहत
सरकार ने करीब एक लाख अति गरीब परिवारों को राहत देते हुए एक मीटर पर 300 यूनिट तक पूरी तरह मुफ्त बिजली देने का निर्णय लिया है। इन उपभोक्ताओं को जीरो बिल मिलेगा और किसी प्रकार का टैक्स या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। बीपीएल परिवारों को भी दो मीटरों पर 125-125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ जारी रहेगा।
कृषि उपभोक्ताओं को सब्सिडी जारी
कृषि क्षेत्र को राहत देते हुए सरकार ने सब्सिडी जारी रखी है। 0 से 20 केवीए तक के कनेक्शन पर 5.03 रुपये प्रति यूनिट की दर पर 4.73 रुपये की सब्सिडी मिलेगी, जिससे प्रभावी दर मात्र 30 पैसे प्रति यूनिट रह जाएगी। हालांकि, 105 रुपये प्रतिमाह फिक्स चार्ज देना होगा।
सब्सिडी से बाहर होंगे लाखों उपभोक्ता
नई व्यवस्था लागू होने के बाद दो से अधिक मीटर रखने वाले लाखों उपभोक्ता सब्सिडी के दायरे से बाहर हो जाएंगे। खासकर शिमला सहित शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला भवनों और किराये के मकानों में रहने वाले लोगों पर इसका असर पड़ेगा।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि यह फैसला गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को लक्षित राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। साथ ही, सब्सिडी प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राशन कार्ड लिंकिंग और डिजिटल डेटा सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने बिजली सब्सिडी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की चुनावी गारंटी के बीच अब 126 यूनिट से अधिक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी समाप्त कर दी गई है। नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गई है।
पहले 126 से 300 यूनिट तक उपभोक्ताओं को 1.73 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी मिलती थी, जिससे प्रभावी दर 4.17 रुपये प्रति यूनिट पड़ती थी। अब 126 यूनिट से अधिक खपत पर सीधे 5.89 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल जारी होंगे। इसके साथ ही 85 रुपये प्रतिमाह फिक्स चार्ज भी देना होगा।
125 यूनिट तक ही मुफ्त बिजली
नई व्यवस्था के तहत अब केवल 0 से 125 यूनिट तक बिजली निशुल्क मिलेगी। यह लाभ अधिकतम दो घरेलू मीटरों पर ही दिया जाएगा। इसके लिए उपभोक्ताओं को अपने बिजली मीटर को राशन कार्ड से लिंक करवाना अनिवार्य होगा।
दो से अधिक मीटर रखने वाले उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक भी 5.44 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल देना होगा। वहीं 126 यूनिट से अधिक खपत होने पर पूरे उपभोग पर 5.89 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल जारी किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक राशन कार्ड पर केवल दो मीटरों को ही सब्सिडी के दायरे में रखा जाएगा।
अति गरीब परिवारों को बड़ी राहत
सरकार ने करीब एक लाख अति गरीब परिवारों को राहत देते हुए एक मीटर पर 300 यूनिट तक पूरी तरह मुफ्त बिजली देने का निर्णय लिया है। इन उपभोक्ताओं को जीरो बिल मिलेगा और किसी प्रकार का टैक्स या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। बीपीएल परिवारों को भी दो मीटरों पर 125-125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ जारी रहेगा।
कृषि उपभोक्ताओं को सब्सिडी जारी
कृषि क्षेत्र को राहत देते हुए सरकार ने सब्सिडी जारी रखी है। 0 से 20 केवीए तक के कनेक्शन पर 5.03 रुपये प्रति यूनिट की दर पर 4.73 रुपये की सब्सिडी मिलेगी, जिससे प्रभावी दर मात्र 30 पैसे प्रति यूनिट रह जाएगी। हालांकि, 105 रुपये प्रतिमाह फिक्स चार्ज देना होगा।
सब्सिडी से बाहर होंगे लाखों उपभोक्ता
नई व्यवस्था लागू होने के बाद दो से अधिक मीटर रखने वाले लाखों उपभोक्ता सब्सिडी के दायरे से बाहर हो जाएंगे। खासकर शिमला सहित शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला भवनों और किराये के मकानों में रहने वाले लोगों पर इसका असर पड़ेगा।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि यह फैसला गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को लक्षित राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। साथ ही, सब्सिडी प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राशन कार्ड लिंकिंग और डिजिटल डेटा सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है।

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