आरक्षण को लेकर हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला! एक नियम तय करेगा अभ्यर्थी की सीट—मेरिट या छूट?

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ब्यूरो रिपोर्ट।

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर सरकार ने ‘Own Merit’ यानी अपने मेरिट के नियम को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का कोई अभ्यर्थी यदि बिना किसी आरक्षण संबंधी छूट का लाभ लिए सामान्य अभ्यर्थियों के बराबर या उससे अधिक मेरिट हासिल करता है, तो उसका चयन आरक्षित कोटे के बजाय अनारक्षित सीट पर किया जाएगा।सरकार ने इस संबंध में सभी सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों और संबंधित संस्थानों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।छूट का लाभ लेने पर आरक्षित पद पर चयननिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ने चयन प्रक्रिया में आयु सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा के अवसर या अन्य किसी प्रकार की निर्धारित छूट का लाभ लिया है, तो उसका चयन आरक्षित पद के विरुद्ध माना जाएगा। वहीं, बिना किसी छूट के सामान्य मानकों को पूरा करते हुए मेरिट में चयनित होने वाले अभ्यर्थी को अनारक्षित पद पर समायोजित किया जाएगा।क्षैतिज आरक्षण पर भी लागू होगा नियमसरकार ने पूर्व सैनिकों, पूर्व सैनिकों के आश्रितों, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों, दिव्यांगजनों, उत्कृष्ट खिलाड़ियों तथा अंत्योदय और बीपीएल श्रेणी के लिए लागू क्षैतिज आरक्षण को लेकर भी प्रक्रिया स्पष्ट की है।यदि इन श्रेणियों से संबंधित कोई अभ्यर्थी बिना किसी छूट के सामान्य मेरिट में स्थान बनाता है, तो उसे पहले उसकी मेरिट के आधार पर अनारक्षित सीट पर समायोजित किया जाएगा।पहले मेरिट, उसके बाद क्षैतिज आरक्षणसरकार के निर्देशों के मुताबिक क्षैतिज आरक्षण लागू करते समय पहले संबंधित ऊर्ध्वाधर आरक्षण श्रेणी के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद यह देखा जाएगा कि चयनित अभ्यर्थियों में संबंधित क्षैतिज आरक्षण श्रेणी के कितने उम्मीदवार पहले से शामिल हैं।यदि निर्धारित संख्या पूरी हो चुकी है तो अतिरिक्त चयन नहीं किया जाएगा। वहीं, यदि संख्या कम है तो मेरिट सूची में नीचे के अभ्यर्थियों की जगह संबंधित क्षैतिज आरक्षण श्रेणी के अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा।सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवालासरकार ने अपने निर्देशों में सुप्रीम कोर्ट के राजेश कुमार दरिया बनाम राजस्थान लोक सेवा आयोग, सौरव यादव बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और जस्टिस सुनंदा भंडारे फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामलों में दिए गए फैसलों का हवाला दिया है। इन फैसलों में मेरिट और क्षैतिज आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है।2014 के निर्देश इस सीमा तक समाप्तसरकार ने 12 दिसंबर 2011 को जारी निर्देशों को दोहराते हुए 12 नवंबर 2014 को जारी निर्देशों को इस सीमा तक समाप्त कर दिया है। साथ ही सभी संबंधित संस्थानों को नए निर्देशों का कड़ाई से पालन करने तथा अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इन प्रावधानों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।यानी अब हिमाचल में आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी यदि बिना किसी छूट के सामान्य मेरिट में चयनित होता है, तो उसे आरक्षित कोटे की सीट नहीं, बल्कि अनारक्षित सीट पर समायोजित किया जाएगा।

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