ब्यूरो रिपोर्ट।
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन की क्रसना लैब की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां 32 वर्षीय दीपक शर्मा ने डॉक्टर की सलाह पर आरएफटी टेस्ट करवाया, लेकिन जब रिपोर्ट मिली तो उसमें उनके नाम की जगह उनके दादा का नाम दर्ज था। नाम की गलती सामने आने के बाद जब रिपोर्ट चिकित्सक को दिखाई गई तो चिकित्सक ने रिपोर्ट में दर्ज क्रिएटिनिन के परिणाम पर भी संदेह जताया।रिपोर्ट में क्रिएटिनिन 1.34 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर दर्ज किया गया था, जबकि दीपक ने उसी दिन क्षेत्रीय अस्पताल के साथ एक निजी लैब में भी यही टेस्ट करवाया। निजी लैब की रिपोर्ट में क्रिएटिनिन 0.82 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर आया। दोनों रिपोर्टों में अंतर सामने आने के बाद मरीज ने अस्पताल प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।जानकारी के अनुसार मामला 9 सितंबर का है। दीपक शर्मा इलाज के लिए क्षेत्रीय अस्पताल सोलन पहुंचे थे। चिकित्सक ने जांच के बाद उन्हें आरएफटी टेस्ट करवाने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने क्रसना लैब में रक्त का सैंपल दिया। रिपोर्ट मिलने पर उन्होंने देखा कि उनके नाम के बजाय उनके दादा का नाम दर्ज था।दीपक ने लैब कर्मचारियों से इस संबंध में पूछताछ की तो बताया गया कि सैंपल देते समय दिए गए मोबाइल नंबर से कुछ समय पहले उनके दादा के नाम की एंट्री सिस्टम में हुई थी। इसी कारण सिस्टम ने रिपोर्ट में उनके दादा का नाम उठा लिया। बताया गया कि दीपक के दादा के पास अपना मोबाइल फोन नहीं था, इसलिए उन्होंने अपना नंबर इस्तेमाल किया था।नाम की इस गलती के बाद मामला उस समय शांत हो गया, लेकिन रिपोर्ट में क्रिएटिनिन की मात्रा देखकर चिकित्सक को संदेह हुआ। इसके बाद दीपक ने अपनी जांच दोबारा निजी लैब में करवाई, जहां क्रिएटिनिन की रिपोर्ट 0.82 आई। दोनों रिपोर्टों में अंतर से वह चिंतित हो गए।गलत रिपोर्ट से उपचार पर पड़ सकता था असरदीपक का कहना है कि यदि चिकित्सक को पहली रिपोर्ट के परिणाम पर संदेह नहीं होता और उसी के आधार पर उपचार शुरू कर दिया जाता तो गलत रिपोर्ट के आधार पर इलाज होने की स्थिति गंभीर हो सकती थी। उनका कहना है कि स्वास्थ्य से जुड़े टेस्ट में मरीज का नाम और जांच परिणाम दोनों सही होना बेहद जरूरी है। इसे केवल मानवीय भूल बताकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।पीड़ित ने उठाए सवालदीपक शर्मा ने कहा कि पहले रिपोर्ट में उनके नाम की जगह दादा का नाम दर्ज किया गया और बाद में जांच के परिणाम पर भी सवाल खड़े हुए। उनका कहना है कि सैंपल लेने और रिपोर्ट जारी करने से पहले मरीज का नाम जांचना संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी है। क्रसना लैब की रिपोर्ट से वह काफी तनाव में आ गए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।अस्पताल प्रशासन ने मांगा जवाबक्षेत्रीय अस्पताल सोलन के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश पंवार ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर क्रसना लैब से जवाब मांगा गया है। लैब का जवाब मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।