नाहन ( संध्या कश्यप , संवाददाता ),
दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने के विरोध में मंगलवार देर शाम जिला मुख्यालय नाहन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नाहन विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय सोलंकी के नेतृत्व में कांग्रेसजन सड़कों पर उतरे और लोकतंत्र, संविधान तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। इसके उपरांत उपायुक्त सिरमौर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया गया।
विरोध मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को लेकर जोरदार नारे लगाए। प्रदर्शन में जिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई, नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया।
इस अवसर पर विधायक अजय सोलंकी ने कहा कि राहुल गांधी लगातार किसानों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों और आम जनता की आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है, जो स्वस्थ लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं, बल्कि जनता का संवैधानिक अधिकार है। किसी भी जनप्रतिनिधि की आवाज को दबाने का प्रयास संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं पर सीधा प्रहार है। कांग्रेस पार्टी हमेशा संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी पूरी मजबूती से करती रहेगी।
विधायक अजय सोलंकी ने विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पहुंचे सभी कांग्रेस पदाधिकारियों, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई तथा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतने कम समय के आह्वान पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं का एकजुट होकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क पर उतरना संगठन की मजबूती और कांग्रेस परिवार की एकता का प्रतीक है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं के उत्साह, समर्पण और अनुशासन की सराहना करते हुए उनका हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया।
प्रदर्शन के उपरांत कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त सिरमौर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।



