कुल्लू (आशा डोगरा , संवाददाता ),
बंजार विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र शौरी ने राजकीय महाविद्यालय बंजार में लंबे समय से रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगभग एक वर्ष से अंग्रेज़ी, केमिस्ट्री और संस्कृत जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ताओं के पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन सरकार इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह मौन है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि बंजार क्षेत्र के विद्यार्थियों के साथ खुला अन्याय और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
आज विधायक सुरेंद्र शौरी ने राजकीय महाविद्यालय बंजार का निरीक्षण किया तथा महाविद्यालय प्रशासन, विद्यार्थियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से शैक्षणिक व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर बलागाड़ वार्ड से जिला परिषद सदस्य कुसुमलता दीपक तथा बंजार ब्लॉक समिति अध्यक्ष लता देवी भी उपस्थित रहीं।
निरीक्षण के दौरान विधायक शौरी ने कहा कि शिक्षकों के अभाव के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि कभी लगभग 1100 विद्यार्थियों वाला यह महाविद्यालय आज घटकर लगभग 600 विद्यार्थियों तक सीमित रह गया है। यह केवल घटती छात्र संख्या नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की विफल शिक्षा नीति और क्षेत्र की लगातार हो रही उपेक्षा का जीवंत प्रमाण है। जब विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी तो उनका दूसरे स्थानों की ओर पलायन स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि सरकार की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निकटवर्ती राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में केमिस्ट्री विषय के सात प्रवक्ता कार्यरत हैं, जबकि बंजार महाविद्यालय में एक भी नियमित प्रवक्ता उपलब्ध नहीं है। यदि सरकार वास्तव में विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर होती तो प्रतिनियुक्ति के माध्यम से कम-से-कम एक या दो प्रवक्ताओं की तत्काल व्यवस्था कर सकती थी। लेकिन सरकार ने बंजार विधानसभा क्षेत्र की अनदेखी को अपनी कार्यशैली बना लिया है।
विधायक शौरी ने बताया कि उन्होंने इस विषय को मार्च माह में शिक्षा मंत्री के संज्ञान में लाया था तथा विधानसभा सत्र के दौरान भी सरकार से रिक्त पदों को तत्काल भरने की मांग की थी। इसके बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे स्पष्ट है कि सरकार के लिए ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा कोई प्राथमिकता नहीं है।
शौरी ने कहा, “सरकार एक ओर प्रदेशभर में कॉलेज और संकाय बंद करने का काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिन महाविद्यालयों में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, वहां न्यूनतम शैक्षणिक सुविधाएं और शिक्षक उपलब्ध कराने में भी पूरी तरह विफल है। यह शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का नहीं, बल्कि उसे कमजोर करने का प्रयास है।”
उन्होंने आगे कहा, “युवा किसी भी प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि सरकार उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी उपलब्ध नहीं करा सकती तो उसे अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करना चाहिए। बंजार के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
विधायक सुरेंद्र शौरी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही रिक्त पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं की गईं तथा अंतरिम व्यवस्था के रूप में प्रतिनियुक्ति के माध्यम से शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई, तो छात्र हित में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
उन्होंने कहा, “शिक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। यदि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती, तो उसे विकास के बड़े-बड़े दावे करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”
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