13 साल बाद जूडो में लौटी चमक : हिमाचल की बहू इंदुबाला ने एशियाई चैंपियनशिप में रचा इतिहास, जीता कांस्य पदक

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मंडी ( नितेश सेनी , संवाददाता ),

हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर से जुड़ी एक बहू ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर ऐसा परचम लहराया है, जिसने पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया है। भारतीय महिला जूडोका इंदुबाला ने चीन में आयोजित एशियाई जूडो चैंपियनशिप में 70 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ ही उन्होंने भारतीय जूडो के 13 वर्षों से चले आ रहे पदक के सूखे को समाप्त कर दिया। गौरतलब है कि इससे पहले भारत को आखिरी बार वर्ष 2013 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई जूडो चैंपियनशिप में पदक मिला था। ऐसे में इंदुबाला की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि भारतीय जूडो के लिए नई उम्मीद और नई शुरुआत का संकेत भी है।
मणिपुर की रहने वाली 27 वर्षीय इंदुबाला, हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर परिवार की बहू हैं और देश के लिए ओलंपिक में बॉक्सिंग प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व कर चुके आशीष चौधरी की धर्मपत्नी हैं। कांस्य पदक के मुकाबले में उन्होंने मंगोलिया की मजबूत प्रतिद्वंद्वी को शानदार तकनीक, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर हराकर जीत हासिल की। मुकाबले के दौरान उनका संयम और रणनीति काबिल-ए-तारीफ रही।

इंदुबाला की इस ऐतिहासिक जीत से खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। लोगों का कहना है कि उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है। उनकी इस सफलता ने यह भी साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी खिलाड़ी वैश्विक मंच पर पहचान बना सकता है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हिमाचल प्रदेश सरकार इस उपलब्धि पर इंदुबाला को किस तरह सम्मानित करती है। प्रदेश में यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्या उन्हें किसी बड़े पुरस्कार या सरकारी पद से नवाजा जाएगा।

इंदुबाला की यह जीत आने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है और भारतीय जूडो को एक नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।

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