शिमला ( विकास शर्मा ,ब्यूरो चीफ ),
भारतीय जनता पार्टी ने जनजातीय मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा राज्यपाल के विरुद्ध दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान बताया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि मंत्री नेगी का यह रवैया न केवल एक संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है, बल्कि यह उनके राजनीतिक अहंकार और प्रशासनिक असफलता को भी उजागर करता है।
भाजपा ने स्पष्ट कहा कि जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े नोटोड़ जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर जिस तरह से मंत्री नेगी लगातार भ्रामक बयान दे रहे हैं, उससे यह साफ है कि वे अपनी सरकार की नाकामियों को छिपाने के लिए राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद को निशाना बना रहे हैं।
भाजपा नेताओं ने कहा कि नोटोड़ का विषय आज का नहीं है, बल्कि पिछले 20-25 वर्षों से यह मुद्दा चर्चा में रहा है। वर्ष 2006 में जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और स्वयं जगत सिंह नेगी विधायक थे, उस समय ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि नोटोड़ की जमीन केवल “लैंडलेस” यानी भूमिहीन लोगों को ही दी जाएगी। 1975 के अधिनियम में लैंडलेस की स्पष्ट परिभाषा दी गई थी और उसी आधार पर यह शर्त लागू की गई।
भाजपा ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार ने जनता को गुमराह करने का काम किया। उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट, 1980 को आंशिक रूप से निलंबित करने की बात कही गई, लेकिन साथ ही 2006 में लगाई गई “लैंडलेस” की शर्त को नहीं हटाया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि वास्तव में किसी भी व्यक्ति को नोटोड़ का लाभ मिल ही नहीं सकता था। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह पूरी तरह से जनजातीय क्षेत्रों के साथ धोखा था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जब प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, तब इस पूरे मामले का गहन अध्ययन किया गया। भाजपा सरकार ने 2006 में लगाई गई उस शर्त को हटाने का रास्ता निकाला ताकि जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को वास्तव में नोटोड़ का लाभ मिल सके। लेकिन उस समय फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण इस पर तत्काल निर्णय लेना संभव नहीं था।
भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) के तहत राज्यपाल को कुछ विशेष अधिकार जरूर दिए गए हैं, लेकिन किसी केंद्रीय कानून को निलंबित करना इतना सरल नहीं है जितना कि मंत्री नेगी जनता को बताने की कोशिश कर रहे हैं। बिना कानूनी प्रक्रिया और नियमों के किसी को भी जमीन नहीं दी जा सकती।
भाजपा नेताओं ने कहा कि आज जनजातीय मंत्री होने के बावजूद जगत सिंह नेगी अपने क्षेत्र और पूरे जनजातीय समाज के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। भाजपा सरकार के समय ट्राइबल सब प्लान के तहत लगभग 400 करोड़ रुपये का बजट तीनों जनजातीय विधानसभा क्षेत्रों के लिए रखा गया था, जिसे वर्तमान कांग्रेस सरकार ने घटाकर लगभग 150 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे साफ है कि वास्तव में जनजातीय विरोधी नीति कौन चला रहा है।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि फॉरेस्ट राइट्स एक्ट (FRA) के तहत जनजातीय लोगों को भूमि अधिकार देने की प्रक्रिया भी वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बेहद धीमी रही है। भाजपा सरकार के समय जहां इस दिशा में पहल शुरू हुई थी, वहीं आज तीन वर्षों में भी बड़ी संख्या में लंबित मामलों का समाधान नहीं हो पाया है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि मंत्री नेगी को अपने व्यवहार और भाषा पर संयम रखना चाहिए। किसी भी संवैधानिक पद, विशेषकर राज्यपाल के विरुद्ध इस प्रकार के बयान देना न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है बल्कि इससे जनजातीय क्षेत्रों के वास्तविक मुद्दे भी पीछे छूट जाते हैं।
भाजपा ने अंत में कहा कि यदि मंत्री नेगी वास्तव में जनजातीय समाज के हितैषी हैं तो उन्हें बयानबाजी छोड़कर केंद्र सरकार और राज्यपाल से संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि नोटोड़, फॉरेस्ट राइट्स और वाइब्रेंट विलेज योजना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ठोस समाधान निकल सके।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास और अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी सदैव प्रतिबद्ध रही है और भविष्य में भी इन मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी।
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