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हिमाचल प्रदेश राजकीय भाषाई अध्यापक संघ ने विद्यार्थियों को 5 ग्रेस अंक देने की मांग उठाई

शिमला (विकास शर्मा ,ब्यूरो चीफ ),


हिमाचल प्रदेश राजकीय भाषाई अध्यापक संघ के राज्य अध्यक्ष हेमराज ठाकुर ने दिनांक 06 मार्च 2026 को आयोजित कक्षा दसवीं की हिंदी विषय की वार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्र में पूछे गए कुछ बहुविकल्पीय प्रश्नों तथा बोर्ड द्वारा जारी उत्तर कुंजी में पाई गई त्रुटियों पर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ ने इस संबंध में धर्मशाला के अध्यक्ष एवं सचिव को एक औपचारिक प्रतिनिधित्व भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है तथा विद्यार्थियों के हित में इन विवादित प्रश्नों के अंक ग्रेस मार्क्स के रूप में प्रदान करने की मांग की है।
संघ के अनुसार हिंदी विषय के प्रश्नपत्र में कुछ प्रश्न ऐसे पूछे गए हैं जो या तो निर्धारित पाठ्यपुस्तकों की सामग्री से मेल नहीं खाते या फिर उनकी संरचना इस प्रकार की है कि विद्यार्थी उत्तर चयन करते समय भ्रमित हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त बोर्ड द्वारा जारी उत्तर कुंजी और पाठ्यपुस्तक की सामग्री में भी कुछ स्थानों पर स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है, जिससे विद्यार्थियों के लिए सही उत्तर चुनना कठिन हो गया।
संघ ने विशेष रूप से पांच प्रश्नों को विवादित बताते हुए कहा है कि इनमें से कुछ प्रश्नों के उत्तर पाठ्यपुस्तक और उत्तर कुंजी में अलग-अलग बताए गए हैं, जबकि कुछ प्रश्नों में व्याकरण के आधार पर विरोधाभासी स्थिति बनती है। उदाहरण के तौर पर “मनु भण्डारी के परिवार का अजमेर में निवास स्थान” संबंधी प्रश्न में उत्तर कुंजी और पाठ्यपुस्तक के उत्तर अलग-अलग बताए गए हैं। इसी प्रकार संयुक्त व्यंजनों की संख्या और “श्र” वर्ण की स्थिति को लेकर भी प्रश्नपत्र तथा उत्तर कुंजी में विरोधाभास दिखाई देता है।
इसके अलावा “अलंकार शब्द का पर्यायवाची नहीं है” तथा “स्रोत के आधार पर शब्दों के भेद” जैसे प्रश्नों में भी विद्यार्थियों के लिए भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना बनी रही, क्योंकि विभिन्न व्याकरण पुस्तकों और स्रोतों में इनके उत्तरों की स्थिति भिन्न-भिन्न रूप में दी गई है।
संघ के राज्य अध्यक्ष हेमराज ठाकुर ने कहा कि इस प्रकार की विसंगतियाँ परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर अनावश्यक प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं। उनका कहना है कि जब पाठ्यपुस्तक, व्याकरण और उत्तर कुंजी के बीच ही विरोधाभास उत्पन्न हो जाए तो ऐसे में विद्यार्थियों को उसके लिए दंडित करना न्यायोचित नहीं होगा।
संघ ने बोर्ड से आग्रह किया है कि विद्यार्थियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इन पाँचों विवादित प्रश्नों के कुल 5 अंक हिंदी विषय के वार्षिक परीक्षा परिणाम में ग्रेस मार्क्स के रूप में प्रदान किए जाएँ ताकि किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो। साथ ही भविष्य में प्रश्नपत्र निर्माण तथा उत्तर कुंजी निर्धारण की प्रक्रिया में पाठ्यपुस्तक और व्याकरण की पूर्ण एकरूपता सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
संघ ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो इस विषय को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा ताकि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित सुरक्षित रह सकें।

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