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सिरमौर जिला में पशु कल्याण पखवाड़े का समापन

पखवाड़े के दौरान पशुओं की देखभाल, पशुओं के स्वास्थ्य आदि पर विस्तृत चर्चा

नाहन (हेमंत चौहान),

संपूर्ण भारत में चल रहे पशु कल्याण पखवाड़े की कड़ी में सिरमौर जिला में भी पशु कल्याण पखवाड़े का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस पखवाड़े के तहत पशु पालन विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं जिनके अन्तर्गत विद्यार्थियों, पशु-पालकों, भेड़ पालकों, ग्रामीण युवाओं को पशु कल्याण से संबन्धित विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गईं।
उप-निदेशक पशुपालन डा. नवीन सिंह ने यह जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि पशुओं के प्रति संवेदना एवं पशु कल्याण के प्रति जागरुकता का प्रसार राष्ट्रीय स्तर पर जन मानस में किया जाना इस पशु कल्याण पखवाड़ा अभियान का मुख्य लक्ष्य था। उन्होंने कहा कि इस पखवाड़े के तहत पशु चिकित्सालय नैहली-धीड़ा में कार्यरत पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ऋतिका गुप्ता ने राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नाहन तथा राजकीय छात्र वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नाहन की छात्राओं को पशु कल्याण तथा पशुओं के प्रति संवेदनशीलता के बारे में जागरुक किया।

डा. नवीन सिंह ने कहा कि पशुओं के कल्याण के दृष्टिगत पशुओं को पांच स्वतन्त्रताएं मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जागरूकत अभियान के दौरान विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों को पशुओं को पाँच स्वतन्त्रताएं सुनिश्चित करना जैसे कि भूख व प्यास से मुक्ति, उचित वातावरण प्रदान करनरा, असुविधा से मुक्ति, दर्द, चोट व बीमारी से मुक्ति, सामान्य व्यवहार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता तथा भय और संकट से मुक्ति प्रदान करना शामिल के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।

उप निदेशक पशुपालन ने बताया कि पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में पशु क्रुरता अधिनियम के बारे में विस्तार से प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि पशु को भूखा-प्यासा रखना, तंग जगह पर बांधना, मारना-पीटना तथा कष्ट पहुंचाना, पशु की क्षमता से अधिक एवं घायल व बूढ़े पशु से कार्य लेना यह सब पशु क्रुरता के दाये में आता है। इसके अलावा भारी चेन से बांधना, मनोरंजन हेतु लड़ने के लिए उकसाना, इलाज से वंचित रखना, अनुचित, गलत या अवैज्ञानिक इलाज करवाना एवं अनाधिकृत एवं अपंजीकृत व्यक्ति से इलाज करवाना, आवश्यकता से अधिक पशुओं को गाड़ी में ढोना एवं पशुओं को बेसहारा या आवारा छोड़ना सभी कार्य पशु क्रूरता में आते हैं तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम तहत दण्डनीय अपराध हैं।

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