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भारतीय रिजर्व बैंक (क्षेत्रीय कार्यालय) की ओर से अंगदान व रक्तदान शिविर आयोजित

शिमला (विकास शर्मा, ब्यूरो चीफ),

शिमला के कसुम्पटी में वीरवार को भारतीय रिजर्व बैंक (क्षेत्रीय कार्यालय)की ओर से अंगदान व रक्तदान शिविर लगाया गया। इसमें करीब 45 लोगों ने रक्तदान किया। इस कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक, शिमला के कर्मचारियों और संविदा कर्मचारियों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक ने समुदाय के स्वास्थ्य और कल्याण में योगदान देने के एक सामान्य उद्देश्य के साथ लोगों को एकजुट करने के लिए एक मंच का आयोजन किया।

भारतीय रिज़र्व बैंक, शिमला और आईजीएमसी के बीच इस सहयोग ने जीवन बचाने में रक्तदान के महत्व के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित की, और एक स्वस्थ समाज को बढ़ावा देने में सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन(सोटो) हिमाचल प्रदेश के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार और आईईसी/ मीडिया कंसलटेंट रामेश्वरी ने रक्तदाताओं को अंगदान के बारे में जानकारी दी । इसमें करीब 10 लोगों ने अंगदान करने के लिए शपथ पत्र भरा।

सोटो के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार ने बताया कि किसी व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए केवल डॉक्टर होना ही जरूरी नहीं है, आप अंगदान करके भी एक समय में एक साथ आठ लोगों का जीवन बचा सकते हैं। अंगदान ब्रेन डेड स्थिति में किया जाता है। अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रदेश भर में सोटो महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। करने के बाद अंगदान करने के लिए व्यक्ति घर बैठे अंगदान का शपथ पत्र भर सकता है। सोटो हिमाचल की वेबसाइट www.sotto.himachal.in पर जाकर प्लीज का ऑर्गन डोनेशन का विकल्प उपलब्ध है। इस पर कोई भी व्यक्ति अपने आधार कार्ड नंबर या आभा आईडी के जरिए अपने व्यक्तिगत जानकारी भरकर अंगदान की शपथ ले सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से निशुल्क है । प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार की ओर से सर्टिफिकेट भी जारी किया जाता है ।

ब्रेन डेड होने की स्थिति में सभी अंगों को सुरक्षित निकालकर जरूरतमंद मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि साल 1954 में देश में पहली बार ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया गया था। उन्होंने बताया कि किसी भी जाति धर्म समुदाय का व्यक्ति अंगदान कर सकता है, इसे किसी भी आयु में दान किया जा सकता है। जीवित रहते हुए पंजीकरण करवाया जा सकता है ताकि मृत्यु के बाद अंग दान किया जा सके। हमारे देश में लोगों में जागरूकता ना होने के कारण अंग दान करने से कतराते हैं, लोगों की इसी भावना को दूर किया जाना जरूरी है।

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