सोलन (कमलजीत, संवाददाता),
आज प्रदेश के विभिन्न विकास खण्डोँ में पँचायतोँ के अधीन पिछले लगभग 20-25 वर्षों से कार्यरत सिलाई अध्यापिकाओँ को सरकार द्वारा पंचायत सचिव के कार्य के लिए अधिकृत किए जाने पर कुछ पंचायत प्रधानोँ द्वारा ब्यान दिए गए कि सिलाई अध्यापिकायेँ सिर्फ सिलाई का काम कर सकती है | जिला परिषद् के अधीन कार्यरत कर्मचारियों व अधिकारियों की माँग का समस्त सिलाई अध्यापिकायेँ समर्थन करती हैं | परन्तु कुछ पंचायत प्रधान जिला परिषद् कर्मचारियों अधिकारियों की मांग का समर्थन करने की आड में सिलाई अध्यापिकाओँ का अपमान करना शुरू कर देते हैं | उन्हें पता ही नहीं चलता है कि माँग का समर्थन करते करते वो कब चाटुकारिता पर कब उतर गये।लगभग 90% सिलाई अध्यापिकायेँ पंचायत सचिव का कार्य करने में पूरी तरह से सक्षम है।
नम्बवर 2017 (छ:वर्षों)से सरकार की गाइड लाईन के अनुसार ही 10 से 5 बजे तक पँचायतोँ का कार्य कर रही है। इन्ही सिलाई अध्यापिकाओँ में से 100 से अधिक अध्यापिकायेँ पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत हैं। कोई भी माँ के गर्भ से सीख कर नहीं आता है और ऐसा भी कोई काम नहीं है जिसे किया नहीं जा सकता है। नई नियुक्ति पर भी कम से कम 15 दिनों का प्रशिक्षण विभाग द्वारा दिया जाता है।सिलाई अध्यापिकायेँ भी निरन्तर कार्य करने व जिम्मेवारी मिलने पर सचिव का कार्य करने में पूरी तरह से सक्षम है। पंचायत प्रधान 5 वर्ष के लिए जनता द्वारा चुना जाता है। जनता को कोई असुविधा न हो प्रधान को इस बात को प्राथमिकता से लेना चाहिए। पँचायतोँ के अधीन होने के कारण कई बार सिलाई अध्यापिकाओँ का राजनैतिक उत्पीड़न हुआ है।
सिलाई अध्यापिकायेँ मजदूर वर्ग का थोड़ा सा वेतन लेने वाली छोटी कर्मचारी है और महिलायेँ है। छोटा कर्मचारी व उनकी नियुक्ति के लिए कोई भी नीति न होने के कारण उनकी योग्यता पर कुछ पंचायत प्रधानों द्वारा टिप्पणी करके सिलाई अध्यापिकाओँ को अपमानित किया जा रहा है, जो हि.प्र.सिलाई-कटाई एवं पंचायत सहायिका कर्मचारी संघ सहन नहीं करेगा। पंचायत प्रधान को खुश होना चाहिए कि जिस जनता ने उसे 5 साल के लिए चुना है उसे कम से कम असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और पंचायत प्रधान को सिलाई अध्यापिका का सहयोग करके उसका मनोबल बढाना चाहिए।पंचायत में काम करने वाले पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, ग्रामीण रोजगार सेवक, सिलाई अध्यापिका और 5 साल के लिए चुने प्रधान/उपप्रधान,वार्ड सदस्य सभी परिवार की तरह रहकर अपना अपना कार्य करते हैं। सभी का वेतन/मानदेय जनता से प्राप्त टैक्स से सरकार द्वारा दिया जाता है। परिवार का मुख्य होने के नाते प्रधान को किसी से भेदभाव नहीं करना चाहिए |
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