दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं कर सकती सरकार: हिमाचल हाईकोर्ट

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ब्यूरो रिपोर्ट।

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह कानूनन भले ही अमान्य हो, लेकिन दूसरी पत्नी को ‘अनैतिक’ नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि एक संवेदनशील और आदर्श नियोक्ता के रूप में सरकार आर्थिक रूप से कमजोर और आश्रित दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के लाभ से वंचित नहीं कर सकती।यह फैसला मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार की अपील खारिज करते हुए सुनाया।मामला उर्मिला देवी की पारिवारिक पेंशन से जुड़ा है। उर्मिला देवी का विवाह 3 अप्रैल 1987 को एक सरकारी कर्मचारी से हुआ था। उस समय कर्मचारी की पहली पत्नी जीवित थीं। इस कारण विवाह तकनीकी रूप से द्विविवाह के दायरे में आता था। इस विवाह से उर्मिला देवी के दो बेटे भी हुए।सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उर्मिला देवी ने पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया, लेकिन पेंशन विभाग ने 18 फरवरी 2022 को उनका दावा खारिज कर दिया। विभाग ने सेंट्रल सिविल सर्विसेज पेंशन रूल्स, 1972 के नियम 54(13) का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी शादी को पेंशन लाभ के लिए मान्यता नहीं दी जा सकती।इसके बाद उर्मिला देवी ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच का रुख किया। सिंगल बेंच ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, जिसे राज्य सरकार ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी।खंडपीठ ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया और कहा कि दूसरी पत्नी को केवल विवाह की कानूनी स्थिति के आधार पर अनैतिक या पेंशन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

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