ब्यूरो रिपोर्ट
रामपुर। शिमला जिला के रामपुर में 15 जुलाई को रामपुर-खोलीघाट वाया कोठाधार मार्ग पर हुए एचआरटीसी बस हादसे की मंडलीय स्तरीय निरीक्षण समिति ने प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। जांच में बस में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी नहीं पाई गई है। समिति ने हादसे का प्रमुख कारण दुर्घटनास्थल पर सड़क का अत्यंत संकरा होना और सड़क के बाहरी किनारे का धंसना बताया है।
मंडलीय प्रबंधक शिमला की अध्यक्षता में गठित समिति ने 16 जुलाई को घटनास्थल और दुर्घटनाग्रस्त बस का निरीक्षण किया। तकनीकी जांच के दौरान बस के फ्रंट स्प्रिंग लीफ कमानी, टाई-रॉड एंड, ब्रेक सिस्टम और ब्रेक प्रेशर पाइप सहित सभी महत्वपूर्ण यांत्रिक हिस्से सही एवं कार्यशील पाए गए।
समिति के अनुसार दुर्घटनास्थल पर सड़क की चौड़ाई महज 2.63 मीटर थी, जबकि बस की चौड़ाई 2.34 मीटर थी। ऐसे में बस के लिए दोनों ओर बचने के लिए केवल 29 सेंटीमीटर अतिरिक्त जगह उपलब्ध थी। निरीक्षण में सड़क का बाहरी किनारा धंसा हुआ पाया गया। इसके चलते बस का पिछला हिस्सा सड़क से नीचे कृषि भूमि की ओर खिसक गया और बस करीब 150 मीटर गहरी ढलान में लुढ़कने के बाद जाकर रुकी।
हादसे के समय बस में 24 यात्री सवार थे। दुर्घटना में डाकू राम (70) की मौके पर ही मौत हो गई। एचआरटीसी परिचालक जय प्रकाश ने खनेरी अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि अमर सिंह (72) की आईजीएमसी शिमला ले जाते समय मृत्यु हो गई।
वर्तमान में छह घायलों का उपचार एमजीएमसी अस्पताल खनेरी और तीन घायलों का उपचार आईजीएमसी शिमला में चल रहा है। एचआरटीसी प्रबंधन ने कहा है कि सभी घायलों के उपचार का पूरा खर्च निगम द्वारा वहन किया जा रहा है। प्रभावित यात्रियों और उनके परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।