लाहौलस्पीति ( रंजीत लाहौली , संवाददाता ),
शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूलों में मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) तैयार करने वाले कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से उनके लिए स्थायी नीति बनाने तथा मानदेय में उचित बढ़ोतरी करने की मांग उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र 5000 रुपये मासिक मानदेय मिल रहा है, जिससे परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले चार वर्षों में सरकार ने उनके मानदेय में केवल 500 रुपये की मामूली बढ़ोतरी की है, लेकिन आज तक इसकी अधिसूचना भी विधिवत जारी नहीं की गई। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में इतने कम मानदेय पर काम करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
मिड-डे मील वर्करों ने कहा कि वे वर्षों से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी सेवाओं और भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि उनके लिए स्थायी नीति बनाकर सामाजिक सुरक्षा, सेवा शर्तों और भविष्य की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिलता, जिसके कारण आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि नियमित वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि कर्मचारियों को अनावश्यक कठिनाइयों से न गुजरना पड़े।
लाहौल-स्पीति के मिड-डे मील वर्करों ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके।

