बिलासपुर में जिला स्तरीय मॉक ड्रिल संपन्न, विभागों ने दिखाया समन्वय, आपात स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों का किया अभ्यास

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बिलासपुर (मनदीप राणा, संवाददाता),
जिला मुख्यालय बिलासपुर में आज जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला स्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य आगजनी और भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की वास्तविक परिस्थितियों में तैयारी और समन्वय का मूल्यांकन करना था। ड्रिल के लिए दो स्थानों को निर्धारित किया गया था। साइट-1 के रूप में बिलासपुर कॉलेज और साइट-2 के रूप में बॉयज स्कूल बिलासपुर को चुना गया। इन दोनों स्थानों पर आपदा की काल्पनिक घटनाओं को दर्शाते हुए बचाव दलों की तत्परता, प्रतिक्रिया समय और राहत समन्वय की जांच की गई।

साइट-1 पर बिलासपुर कॉलेज के बीबीए ब्लॉक में आग लगने की घटना को दर्शाया गया। जैसे ही आग लगने की सूचना प्राप्त हुई, शहर में सायरन बजा दिया गया। सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल, दमकल विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत बोर्ड, जलशक्ति विभाग, होमगार्ड और रेडक्रॉस की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं। होमगार्ड जवानों ने मौके पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए। इस मॉक ड्रिल में कुल 53 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 20 छात्र, 30 छात्राएं और तीन बच्चे शामिल थे। आगजनी की इस काल्पनिक घटना में पांच छात्र और तीन छात्राएं गंभीर रूप से घायल दर्शाए गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए एम्बुलेंस द्वारा क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर पहुंचाया गया।

वहीं साइट-2 पर बॉयज स्कूल बिलासपुर में भूकंप के कारण भवन गिरने की स्थिति उत्पन्न होने का अभ्यास किया गया। सूचना प्राप्त होते ही राहत दलों ने तुरंत घटनास्थल की घेराबंदी की और खोज एवं बचाव कार्य शुरू किया। मलबे में दबे 17 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें से कुछ को हल्की चोटें आने पर मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। इस दौरान अतिरिक्त उपायुक्त ओमकांत ठाकुर जिला नियंत्रण कक्ष से राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे थे, जबकि एसडीएम सदर राजदीप सिंह ने मौके पर पहुंचकर इंसिडेंट एरिया का निरीक्षण किया और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को त्वरित समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए।

अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना और यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक आपदा की स्थिति में तुरंत एवं प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की ड्रिल से प्रशासनिक तैयारी का मूल्यांकन होता है तथा संभावित कमियों की पहचान कर उन्हें सुधारने का अवसर मिलता है। उन्होंने आगे कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि किसी भी आपदा के समय मानवीय क्षति को न्यूनतम किया जाए और राहत कार्यों में अधिकतम दक्षता सुनिश्चित की जा सके। इस अवसर पर उन्होंने सभी विभागों से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं को अद्यतन करें और कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण प्रदान करें ताकि आपातकालीन स्थिति में कोई भी विभाग अप्रस्तुत न हो। मॉक ड्रिल के सफल आयोजन में पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, जलशक्ति विभाग, विद्युत बोर्ड, रेडक्रॉस, एनसीसी, एनएसएस और होमगार्ड कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

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