निशेष शर्मा
राजगढ़। सिरमौर जिले के राजगढ़ क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों और कथित जाली कृषक प्रमाण पत्र के आधार पर जमीनों की खरीद-फरोख्त का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर राजगढ़ पुलिस थाना में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।पुलिस को दी गई शिकायत में शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार निवासी चौपाल, जिला शिमला ने आरोप लगाया है कि मोहाली निवासी संदीप कुमार और उसके सहयोगियों ने हिमाचल प्रदेश के सोलन, शिमला और सिरमौर जिलों में करोड़ों रुपये की संपत्तियों के सौदे किए। आरोप है कि इन सौदों के लिए हिमाचल प्रदेश भूमि सुधार एवं भू-व्यवस्था अधिनियम, 1972 की धारा 118 के प्रावधानों को दरकिनार करने के उद्देश्य से कथित तौर पर फर्जी कृषक प्रमाण पत्र का सहारा लिया गया।शिकायत के अनुसार, आरोपी संदीप कुमार ने मंडी जिले के सरकाघाट से कथित तौर पर फर्जी कृषक प्रमाण पत्र हासिल किया था। आरोप है कि प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अपनी पहचान और पिता के नाम में हेरफेर करते हुए एक अन्य व्यक्ति सुरजीत कुमार को अपना पिता दर्शाया गया और स्वयं को कृषक साबित किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि उन्हें इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी होती तो वह अपनी जमीन आरोपी के नाम कभी नहीं करते।शिकायत में बताया गया है कि इसी प्रमाण पत्र के आधार पर 26 मार्च 2024 को राजगढ़ के नया नेटी क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई। इसके बाद कथित तौर पर इसी दस्तावेज और उससे तैयार करवाए गए अन्य प्रमाण पत्रों के आधार पर कंडाघाट, पझौता और शिमला के सुन्नी सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी जमीनों के सौदे किए गए। इतना ही नहीं, आरोप है कि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से इन संपत्तियों को आरोपी ने अपने बेटे वंश लुथरा के नाम भी हस्तांतरित करवाया।मामले में अलग-अलग पतों वाले कई आधार कार्डों के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई है। प्रारंभिक जांच और दस्तावेजों के अवलोकन के आधार पर पुलिस इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।राजगढ़ के डीएसपी विद्या चंद नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस थाना राजगढ़ में भारतीय दंड संहिता की धारा 465, 468, 471, 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की आगामी जांच जारी है।पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी कि कथित फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए कितनी संपत्तियों के सौदे किए गए और इस पूरे मामले में अन्य किन लोगों की भूमिका रही है।