ब्यूरो रिपोर्ट
शिमला। हिमाचल प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज शिमला में मरीजों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने और वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा सरकारी ड्यूटी के दौरान कथित तौर पर निजी प्रैक्टिस करने का गंभीर मामला सामने आया है। कॉलेज के कुछ स्टाफ सदस्यों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य सचिव और मुख्य न्यायाधीश को लिखित शिकायत भेजकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पेरियो और ओरल सर्जरी विभाग के दो वरिष्ठ डॉक्टर सरकारी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सरकार ने डेंटल कॉलेज में दांतों के इम्प्लांट की फीस 6,700 रुपये निर्धारित कर रखी है, जबकि आरोप है कि मरीजों से कथित तौर पर 14,000 रुपये प्रति इम्प्लांट वसूले जा रहे हैं।वेंडर की भूमिका पर भी उठे सवालशिकायत में इम्प्लांट सप्लाई करने वाले एक वेंडर की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि मरीजों से निर्धारित राशि से अधिक रकम वसूली जाती है और आरोपी डॉक्टरों को प्रति इम्प्लांट 4,000 से 5,000 रुपये तक नकद कमीशन दिए जाने की बात कही गई है। शिकायत में यह भी आरोप है कि संबंधित वेंडर को ओरल सर्जरी विभाग में कथित तौर पर लॉकर/अलमारी उपलब्ध करवाई गई है।सरकारी ड्यूटी के दौरान निजी क्लीनिक में काम करने का आरोपशिकायतकर्ताओं ने दो वरिष्ठ डॉक्टरों पर सरकारी ड्यूटी के समय शिमला और आसपास के निजी क्लीनिकों में सेवाएं देने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, एक डॉक्टर न्यू शिमला और दूसरे डॉक्टर पंथाघाटी स्थित निजी क्लीनिक में कथित तौर पर डेंटल इम्प्लांट का काम कर रहे हैं।ओटी रजिस्टर चोरी का भी जिक्रशिकायत में कॉलेज से जुड़ी एक पुरानी घटना का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि एक डॉक्टर के कथित इशारे पर एक इंटर्न के माध्यम से ओटी का रजिस्टर चोरी करवाया गया था। शिकायत के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इंटर्न को पकड़ लिया गया था और उसने तत्कालीन प्राचार्य के समक्ष लिखित माफीनामा भी दिया था।गहन जांच का भरोसामामले को लेकर सरकारी डेंटल कॉलेज शिमला के प्राचार्य डॉ. योगेश भारद्वाज ने कहा कि उन्हें सोमवार को ही इस संबंध में शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि वह कॉलेज में अभी नए हैं, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी गहन जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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