माता-पिता के बाद सरकार बनी सहारा, सुख आश्रय योजना से मिली नई उम्मीद

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ब्यूरो रिपोर्ट।

हमीरपुर। माता-पिता का साया उठ जाने के बाद जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे बच्चों के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना नई उम्मीद बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत बेसहारा बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ स्टेट’ का दर्जा देकर उनकी 27 वर्ष की आयु तक शिक्षा, पालन-पोषण, स्वरोजगार, आवास और विवाह तक की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा उठाई जा रही है।हमीरपुर जिले के मझोग सुल्तानी क्षेत्र के गांव पंजयाली निवासी एस्ले वर्मा इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। वर्ष 2007 में मां और वर्ष 2020 में पिता के निधन के बाद एस्ले, उनके छोटे भाई और बहन के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया था। रिश्तेदारों ने सहयोग किया, लेकिन स्थायी सहारे की कमी बनी रही।मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना शुरू होने के बाद एस्ले वर्मा और उनके भाई-बहन को नई दिशा मिली। योजना के तहत उन्हें आर्थिक सहायता के साथ-साथ उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा और अन्य सुविधाओं का लाभ मिला। वर्तमान में एस्ले जेबीटी का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि उनके छोटे भाई आईटीआई डिप्लोमा कर रहे हैं। उनकी बहन का विवाह भी हो चुका है।योजना के अंतर्गत उन्हें आवास निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये की सहायता भी प्रदान की गई, जिससे अन्य सहयोग के साथ उनका पक्का मकान लगभग तैयार हो चुका है।एस्ले वर्मा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना बेसहारा बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि इस योजना ने न केवल उन्हें आर्थिक सहारा दिया, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ बेहतर भविष्य की राह भी दिखाई है।प्रदेश सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के माध्यम से हजारों बेसहारा बच्चों और युवाओं को शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

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