ब्यूरो रिपोर्ट सोलन।
देश के फार्मा हब के रूप में पहचान बना चुके हिमाचल प्रदेश की साख को एक बार फिर गहरा आघात लगा है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा जारी ताजा ड्रग अलर्ट में हिमाचल में निर्मित 71 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं।इस माह देशभर में कुल 218 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में असफल रहे, जिनमें से लगभग 33 प्रतिशत दवाएं हिमाचल में बनी हुई हैं। यह स्थिति न केवल प्रदेश की औद्योगिक छवि के लिए चिंताजनक है, बल्कि मरीजों की सेहत पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।फेल हुई दवाओं में सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर रोगों तक की दवाएं शामिल हैं। इनमें बुखार, शरीर दर्द, उच्च रक्तचाप (बीपी), हृदय रोग, एलर्जी और किडनी संबंधी बीमारियों की दवाएं शामिल बताई गई हैं। दवाओं के बार-बार सैंपल फेल होने से गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।दवा कंपनियों को कारण बताओ नोटिसपिछले कुछ समय से हर माह 50 से अधिक दवाओं के सैंपल फेल होने का सिलसिला जारी है। ड्रग विभाग ने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित दवा उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। साथ ही जिन बैचों के सैंपल फेल हुए हैं, उन्हें बाजार से तत्काल रिकॉल करने के निर्देश दिए गए हैं।राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने पुष्टि करते हुए बताया कि जिन कंपनियों की दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल पाई गई हैं, उन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है और आवश्यक नियामकीय कार्रवाई की जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता नियंत्रण में सख्ती नहीं बरती गई तो प्रदेश के फार्मा उद्योग की विश्वसनीयता पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
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