ब्यूरो रिपोर्ट शिमला।
आर्थिक दबाव, राजकोषीय चुनौतियों और हालिया प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से 286.23 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। यह राशि स्पैशल असिस्टैंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के तहत दो हिस्सों में जारी की गई है।योजना के पार्ट-3 के अंतर्गत 2722.992 लाख रुपए (करीब 27.23 करोड़ रुपए) की दूसरी किस्त जारी की गई है। यह धनराशि सड़क, पुल, भवन तथा अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए निर्धारित है। इसके अतिरिक्त 25900 लाख रुपए (259 करोड़ रुपए) की विशेष सहायता स्वीकृत की गई है, जो प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में अधोसंरचना के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण पर खर्च की जाएगी।10 कार्य दिवस में एजेंसियों को ट्रांसफर अनिवार्यकेंद्र सरकार ने जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि धनराशि 10 कार्य दिवसों के भीतर संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों को हस्तांतरित करनी होगी। साथ ही 31 मार्च 2026 तक पूरी राशि का व्यय करना अनिवार्य होगा।निर्देशों के अनुसार, बिना वास्तविक भुगतान के धन को खाते में रोके रखना वैध व्यय नहीं माना जाएगा। समय सीमा में खर्च न होने पर राशि की वापसी या समायोजन की कार्रवाई की जा सकती है।परियोजना में बदलाव से पहले केंद्रीय मंजूरी जरूरीकिसी भी स्वीकृत परियोजना में परिवर्तन करने से पूर्व केंद्र की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। दोहरी फंडिंग पाए जाने पर भविष्य में मिलने वाली केंद्रीय कर हिस्सेदारी से कटौती का प्रावधान रखा गया है। उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर प्रस्तुत न करने पर अगली किस्त रोकी जा सकती है।आरडीजी बंद होने से बढ़ी वित्तीय चिंताराजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से राज्य को पहले ही बड़ा वित्तीय झटका लगा है। इस अनुदान से राजस्व और व्यय के बीच की खाई को पाटा जाता था। अब कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है। विकास कार्यों की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है तथा राज्य को अतिरिक्त कर्ज लेने की नौबत आ सकती है।ऐसे में केंद्र से मिली यह राहत महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन कड़ी शर्तों के कारण राज्य सरकार के सामने समयबद्ध खर्च, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार इस सहायता को विकास की ठोस उपलब्धियों में कितनी तेजी से बदल पाती है।
