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लखनऊ में आयोजित पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले कुलदीप पठानियां, पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा।

शिमला (ब्यूरो रिपोर्ट),

 उत्तर प्रदेश विधान सभा द्वारा विधान भवन मंडप लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने कहा कि पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा है। जब नागरिकों को यह ज्ञात होता है कि कानून कैसे बनते हैं, किस आधार पर निर्णय लिए जाते हैं और उनके प्रतिनिधि संसद में क्या भूमिका निभा रहे हैं, तब लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होता है। प्रौद्योगिकी इस पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से संसद/ सदन की कार्यवाही लाईव प्रसारण विधेयकों का ऑनलाईन प्रकाशन, सांसदो की उपस्थिती और मतदान रिकॉर्ड की सार्वजनिक उतलब्धता नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से विधायी प्रक्रिया से जोड़ती है। भारत में संसद टी0वी0 लोक सभा और राज्य सभा की वेबसाइटें तथा मोबाईल ऐप्स इस दिशा में उल्लेखनीय कदम हैं।

  हिमाचल के संदर्भ में बोलते हुए पठानियां ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पेपर लेस एसैम्बली होने वाला पहला राज्य है तथा हमने यह उपलब्धि 2014 में हासिल कर ली थी। ई-विधान प्रणाली लागू होने से जहाँ विधायी कार्यों में दक्षता तथा पारदर्शिता आई वहीं पेपर के बोझ से भी काफी निजात मिल गई थी। हिमाचल प्रदेश ई-विधान ऐसी नवीनतम तकनीक है इसके जरिए मोबाईल ऐप सेवा, ई-निर्वाचन क्षेत्र प्रबंधन तथा ई-समिति के लागू होने से विधान सभा सदस्यों का सरकारी अधिकारियों तथा जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित हो गया था जिससे कार्य में दक्षता तथा पारदर्शिता दिखने लगी जिसका  अनुसरण देश के लगभग 22 राज्य कर रहे थे। देश में डिजिटल इंडिया अभियान के तहत केन्द्र सरकार द्वारा (नेवा) राष्ट्रीय ई-विधान को पूरे भारत के राज्य विधान मण्डलों में लागू करने के लिए प्रेरित किया गया और अब हिमाचल प्रदेश ने भी राष्ट्रीय ई-विधान को अपना लिया है और अभी पूरी तरह अपनाने में थोड़ा सा समय और लग सकता है। विधान सभा अध्यक्ष यह बात सम्मेलन में आज के दिन चर्चा के लिए लाए गए विषय “पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केन्द्रित विधायी प्रक्रियाओं के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग भूमिका” पर अपना सम्बोधन दे रहे थे।

पठानियां ने कहा कि प्रौद्योगिकी कोई विकल्प नहीं बल्कि आधुनिक लोकतंत्र की आवश्यकता बन चुकी है। पारदर्शी, कुशल और नागरिक – केन्द्रित विधायी प्रक्रिया के लिए डिजिटल नवाचारों का विवेकपूर्ण और समावेशी उपयोग अनिवार्य है। उन्होने कहा कि जब संसद और विधान सभाएं तकनीक के माध्यम से नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित करेंगी, तब लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं बल्कि एक जीवंत  सहभागिता बन जाएगा। उन्होने कहा कि प्रौद्योगिकी के सही उपयोग से विधायी संस्थाएं न केवल अधिक प्रभावी होंगी बल्कि  जनता का विश्वास भी सुदढ़ होगा जो किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।

विधान सभा अध्यक्ष ने आज दो सत्रों का संचालन भी किया संचालन के दौरान सभी पीठासीन अधिकारियों को आबंटित समयावधि के बीच अपने व्यवहारिक, सार्थक, उपयोगी तथा तथ्यपूर्ण सुझाव रखने का आग्रह करते नजर आए। कल सम्मेलन का  समापन समारोह होगा जिसमें उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ भी मौजूद रहेंगे और अपना विवेकपूर्ण सम्बोधन देंगे।

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