शिमला (ब्यूरो रिपोर्ट),
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से बारिश न होने और सूखे जैसे हालात के चलते नदियों और खड्डों का जलस्तर तेजी से घट गया है, जिसका सीधा असर प्रदेश की जलविद्युत परियोजनाओं पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई बिजली परियोजनाओं में बिजली उत्पादन 75 प्रतिशत तक कम हो गया है।राज्य में सतलुज, ब्यास, रावी, चेनाब और यमुना सहित प्रमुख नदियों में पानी का बहाव सामान्य से काफी कम दर्ज किया जा रहा है। वहीं छोटी खड्डों और नालों में पानी लगभग सूखने की कगार पर पहुंच गया है। जलस्तर घटने से रन-ऑफ-द-रिवर आधारित परियोजनाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।ऊर्जा विभाग के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में जहां इन दिनों प्रदेश की परियोजनाओं से प्रतिदिन औसतन अच्छी मात्रा में बिजली उत्पादन होता है, वहीं अब उत्पादन बेहद सीमित रह गया है। कई परियोजनाओं को तो न्यूनतम तकनीकी क्षमता पर ही चलाया जा रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर उत्पादन अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ा है।बिजली उत्पादन में आई भारी गिरावट के कारण प्रदेश को बाहरी राज्यों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक दबाव भी बढ़ गया है। साथ ही आने वाले दिनों में यदि बारिश नहीं हुई तो बिजली आपूर्ति पर और असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष सर्दियों में सामान्य से कम बर्फबारी और समय पर मानसून सक्रिय न होने के कारण जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाए। यही वजह है कि अब गर्मी से पहले ही सूखे जैसे हालात बन गए हैं।राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विभाग ने उम्मीद जताई है कि आगामी दिनों में यदि बारिश और बर्फबारी होती है तो नदियों का जलस्तर बढ़ेगा और बिजली उत्पादन में भी सुधार आएगा
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