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बहुचर्चित विमल नेगी मौत केस में CBI की पहली गिरफ्तारी, निलंबित ASI पंकज शर्मा अरेस्ट

झंदुता (जीवन सिंह,संवाददाता),

हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी मौत के चर्चित मामले में सीबीआई ने पहली गिरफ्तारी कर बड़ा कदम उठाया है। रविवार दोपहर सीबीआई की टीम ने निलंबित एएसआई पंकज शर्मा को बिलासपुर जिले के घुमारवीं से गिरफ्तार किया। अब उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा।जांच एजेंसी ने हाल ही में पंकज शर्मा के घर पर छापेमारी कर कुछ दस्तावेज बरामद किए थे, जिन्हें अहम सबूत माना जा रहा है। आरोप है कि उसने विमल नेगी की जेब से पेन ड्राइव निकाली और बाद में बिलासपुर जाकर नेगी का लैपटॉप कब्जे में लेकर उसका डेटा डिलीट किया। यही कारण है कि सीबीआई ने कई दौर की पूछताछ के बाद उसकी गिरफ्तारी की।पंकज शर्मा किसी भी जांच टीम का हिस्सा नहीं थे, लेकिन फिर भी घटना के समय सबसे पहले मौके पर मौजूद थे। उस पर साक्ष्य छिपाने और नष्ट करने का आरोप है। सीबीआई ने इससे पहले भी उसे कई बार बुलाकर पूछताछ की थी और पेन ड्राइव को फॉर्मेट करने के मामले में जवाब तलब किया था।सीबीआई की जांच का दायरा पावर कारपोरेशन के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों तक फैला हुआ है। इस मामले में पहले ही पावर कारपोरेशन के तत्कालीन एमडी हरिकेश मीणा और निदेशक देशराज गिरफ्तार हो चुके हैं, हालांकि दोनों फिलहाल जमानत पर हैं। सीबीआई ने नेगी की पत्नी किरण नेगी और उनके भाई सुरेंद्र नेगी के बयान भी दर्ज किए हैं।10 मार्च को विमल नेगी शिमला से अचानक लापता हो गए थे। आठ दिन बाद यानी 18 मार्च को उनका शव बिलासपुर की गोविंद सागर झील के किनारे मिला। इस मौत पर सवाल उठे और परिजनों ने उच्च अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया। पत्नी किरण नेगी ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 108 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है। धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी है। सीबीआई इस मामले में कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है।सीबीआई जांच के दौरान ही राज्य सरकार ने पावर कॉर्पोरेशन के निलंबित निदेशक देशराज को बहाल कर दिया और उन्हें हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड में उनके पुराने पद चीफ इंजीनियर पर नियुक्त कर दिया।विमल नेगी मौत मामले की जांच को लेकर प्रशासनिक व पुलिस तंत्र में हलचल मची थी। इस मामले में अनुशासन हीनता और लापरवाही को आधार बनाकर हिमाचल सरकार की ओर से तीन अधिकारियों को अवकाश पर जाने के लिए कहा था। इन अधिकारियों में अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, तत्कालीन प्रदेश पुलिस महानिदेशक डॉ. अतुल वर्मा व जिला शिमला के पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी शामिल थे।पुलिस महकमे में भी तुरंत प्रभाव से बदलाव किए गए थे। विजिलेंस डीजी अशोक तिवारी को पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। साथ ही सोलन के एसपी गौरव सिंह को शिमला का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया था। हालांकि बाद में अवकाश के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा औऱ एसपी शिमला संजीव गांधी ने अपनी ड्यूटी जॉइन कर ली थी।

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