राजगढ़ (पवन तोमर, ब्यूरो चीफ),
हरिओम गौशाला यशवंतनगर में चल रहे गौ महोत्सव के दौरान व्यास पीठ से आचार्य सुमित भारद्वाज जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन में माता-पिता की सेवा करना हर संतान का कर्तव्य है। इसी प्रकार गाय को केवल पशु न मानकर ‘माता’ के रूप में पूजना और उसकी सेवा करना भी उतना ही आवश्यक है।आचार्य भारद्वाज ने कहा कि गाय माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है। यह अत्यंत खेदजनक है कि भारत जैसी पवित्र सनातन भूमि में, जहाँ स्वयं भगवान ने गोपाल बनकर जन्म लिया, वहीं पर आज गायों का वध किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में भारत सरकार 26 हजार बूचड़खानों का संचालन कर रही है, जो चिंता का विषय है।उन्होंने कहा कि यदि समाज ने समय रहते गौ संवर्धन के लिए ठोस कदम नहीं उठाए और गाय माता को अपने हृदय में स्थान नहीं दिया, तो समाज को ऐसी त्रासदियों का सामना बार-बार करना पड़ेगा। आचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब गाय भूखी रहती है तो राष्ट्र में अशांति और विपत्ति का वातावरण उत्पन्न होता है। अतः यदि हम सुखी और समृद्ध राष्ट्र की कामना करते हैं तो सबसे पहले हमें गाय को सुखी रखना होगा।उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि सभी समाजजन गौशालाओं में सहयोग करें, ताकि गौ माता की उचित देखभाल और संरक्षण संभव हो सके।
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