सुरजीत नेगी/किन्नौर।
उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा की अध्यक्षता में आज जिला के रिकांग पिओ स्थित उपायुक्त कार्यालय सभागार कक्ष में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के अंतर्गत एक बैठक का आयोजन किया गया तथा अधिनियम की बारीकियों से उपस्थित जनों को अवगत करवाया गया। उपायुक्त ने इस अवसर पर कहा कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह को रोकना है तथा नाबालिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अधिनियम से जिला के आम लोगों को जागरूक करने के लिए संयुक्त तत्वाधान में समय-समय पर जागरूकता शिविरों का आयोजन करें तथा इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि यह शिविर ऐसे स्थानों पर आयोजित किए जाएं जहां पर बाल विवाह की समस्या अधिक देखने को मिलती है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी जय कुमार गुप्ता ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 पर जानकारी देते हुए बताया कि 21 वर्ष से कम आयु के पुरूष और 18 वर्ष से कम आयु की महिला के विवाह को बाल विवाह माना जाता है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति बाल विवाह करता है या अन्य का बाल विवाह करवाता है तो उसे दो वर्ष का कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाओं का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत बाल विवाह को अमान्य घोषित किया जा सकता है। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अभिषेक शेखर, प्राचार्य डाईट रिकांग पिओ कुलदीप नेगी, कांस्टेबल शुभ कांता, जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय से कानून संरक्षण अधिकारी मनिषा नेगी उपस्थित थे।
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