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संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर मनुवादी दृष्टिकोण को मजबूत कर रही है मोदी सरकार

ददाहु (हेमंत चौहान, संवाददाता),

दलित शोषण मुक्ति मंच जिला सिरमौर के जिला संयोजक आशीष कुमार, जिला कमेटी सदस्य परवीन सोढा, पूर्व विकास खंड अधिकारी राजेश तोमर और दलित शोषण मुक्ति मंच के सदस्यों ने जारी एक प्रेस वार्ता मे कहा कि दलित हैदराबाद के राष्ट्रीय दलित सम्मेलन मे 25 राज्यों से आये 100 से ज़्यादा सगठनों ने दलित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्कारात्मक चर्चा करते हुए एक 11 सूत्रीय माँग पत्र को अपनाया गया | ये सर्वविदित है कि अनुसूचित जाति के समुदायों के सदस्य सविंधान लागु होने के बाद भी हर तरह के भेदभाव उत्पीड़न हिंसा और घौर अन्याय का सामना कर रहे है और भाजपा सरकार के सत्ता मे आने के बाद स्थिति और खराब हो गई है | ये सरकार ऐसे तरीकों से काम कर रहे है जो संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रहे है और शासन मे मनुवादी दृष्टिकोण को।मजबूत कर रहे है । परिणामसवरूप भारतीय नागरिकों के कड़ी मेहनत से हासिल सभी अधिकारों पर हमला हो रहा है और दलित समुदाय अधिक प्रभावित हो रहा है ।

आशीष कुमार ने कहा कि हम इन नीतियों को उलटने की मांग करते हुए सम्मेलन ने तय किया कि दिसंबर माह मे राष्ट्रपति को दलित अधिकारों के रक्षा के लिए 11 सूत्रीय मांग पत्र के साथ 1 करोड़ हस्ताक्षर माननीय राष्ट्रपति महोदया को प्रेषित किये जाएंगे । आशीष कुमार ने कहा कि इस कड़ी मे हिमाचल प्रदेश मे हस्ताक्षर अभियान किया जायेगा और इस कड़ी मे जिला सिरमौर से 1लाख के करीब हस्ताक्षर भेजे जाएंगे । हिमाचल प्रदेश मे स्थानीय स्तर पर भी मांगों को उठाया जायेगा। आशीष कुमार ने कहा की हिमाचल प्रदेश मे व्यवस्था परिवर्तन का दावा करके सरकार बनी और माननीय सुखविंदर सिंह जब विपक्ष मे थे तो ये दलित शोषण मुक्ति मंच के मांग पत्र के समर्थन मे आये थे , परन्तु आने के बाद हालात यही है अनुसूचित जाति आयोग के चैयरमेन का पद पिछले 9 महीनों से खाली है |

दलित शोषण मुक्ति मंच ने साफ साफ कहा कि हिमाचल मे 85 वें संविधान संशोधन को लागु किया जाये | निजी क्षेत्र और सरकार के फंड से की जाने वाली हर न्युक्ति मे आरक्षण रोस्टर लागु किया जाए। केंद्रीय बजट की उपयोजनाओ अनुसूचित जाति के लिए आबंटित धनराशि का इस्तेमाल केवल इसी उदेश्य के लिए किया जाना चाहिए और राज्यों के लिए समान कानून बनाये जाने चाहिए | फंडों के डायवर्जन या गैर उपयोग को एक आपराधिक करार दिया जाना चाहिए। सामान्य जनगणना के साथ साथ जाति जनगणना भी कराई जानी चाहिए। हिमाचल प्रदेश मे शामलात भूमि मे बसे अनुसचित जाति वर्ग और किसी भी जाति के भूमिहींनो को मालिकाना अधिकार दिया जाए । 5 एकड़ जमीन हर भूमिहीन को दी जानी चाहिए | मनरेगा के कार्यदिवस बढ़ा कर 200 दिन और 600 रुपए न्यूनतम दिहाडी देनी चाहिए। इसके इलावा प्रदेश के सरकारी विभागों मे खाली पड़े बैकलोग के पदों को भरा जाना चाहिए ताकि लोगों को रोजगार मिल सके।

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