भरमौर (महिंद्र पटियाल/संवाददाता),
विश्व -विख्यात पवित्र मणिमहेश कैलाश धाम जहां पर पंहुचने का हर श्रद्धालुओं का दिल करता है लेकिन अप्रैल माह में भारी बर्फबारी में वहां पंहुचना काफी जोखिम भरा रहता है | गत वर्ष ही नुरपूर कांगडा के दो युवकों द्वारा फरवरी माह में ही मणिमहेश जाने के लिए कूच किया था लेकिन उन्हें बीच रास्ते से ही वापिस लौटना पड़ा, उसके बाद 11 अप्रैल को पंजाब के श्रद्धालुओं द्वारा भारी बर्फबारी में मणिमहेश पंहुचने में कामयाबी हासिल की व प्रथम दर्शन मणिमहेश मंदिर 2023 के दर्शन भी सर्वप्रथम उनके नाम रहे | भारी बर्फबारी में उनके द्वारा मणिमहेश मंदिर में फूलों की बरसात कर पूजा अर्चना की गई | सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट को सभी ने सराहा व उनकी शिव भक्ति की भी तारीफ की | शुक्रवार को दूसरा पंजाब का ग्रुप स्थानीय ट्रैकर पप्पू गाईड, विटु गाईड की अगुवाई में मणिमहेश झील के दर्शन कर शकुशल लौटा, जिसमें 25 लोग शामिल थे | यह जानकारी देते हुए हडसर गांव के निवासी व स्थानीय ट्रैकर गाईड पप्पू शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को हमारा ग्रुप मणिमहेश झील के दर्शन कर शकुशल लौटा | उन्होंने बताया कि अभी भी मणिमहेश झील पर 8 फीट के करीब बर्फ है व रास्ते में भी ग्लेशियर है बिना गाईड व जानकारी के अभाव में वंहा पंहुचना असंभव ही नहीं बल्कि खतरों से भी खाली नहीं है | अभी धनछो तक ही रहने व खाने की सुविधा गाईड पप्पू द्वारा दी जा रही है उसके ऊपर का रास्ता भारी बर्फबारी से भरा है |

