राजगढ़ (पवन तोमर/ब्यूरो चीफ),
होनहार बीरवान के होत चिकने पात अर्थात जिस युवा ने आगे बढ़ने की दृढ़इच्छा ठान ली हो उसे लक्ष्य हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता है। यही कहावत प्रगति कश्यप ने चरितार्थ करके दिखाई है। बता दें हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा हाल ही में निकाले गए परिणाम में प्रगति कश्यप का चयन बतौर सहायक प्रोफेसर राजनीति शास्त्र हुआ है। प्रगति कश्यप मूलतः पच्छाद निर्वाचन क्षेत्र के गांव कथेर मलहोटी की रहने वाली है। प्रगति कश्यप के पिता नागेन्द्र कश्यप भारत सरकार के महालेखाकार कार्यालय शिमला में बतौर लेखा अधिकारी और माता संध्या कश्यप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में हिन्दी विषय की प्रवक्ता के पद पर तैनात है। बेटी के सहायक प्रोफेसर के पद पर चयनित होने से परिवार में प्रसन्नता का महौल है लोगों द्वारा दूरभाष पर बधाईयां देने वालों का तांता लग रहा है। कुशाग्र बंुद्धि और मृदुभाषी स्वभाव की धनी प्रगति कश्यप ने बचपन से ही एक उच्चकोटि का शिक्षाविद बनने का सपना संजोए रखा था। इन्होने दस जमा दो तक की शिक्षा शिमला के प्रसिद्ध काॅन्वेट स्कूल ताराहाॅल से ग्रहण की। तदोपंरात पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से बीए और राजनीति शास्त्र में एमए उपाधि हासिल की। प्रगति कश्यप ने पढ़ाई को जारी रखते हुए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एमफिल की उपाधि हासिल करने के उपरांत जेआरएफ की परीक्षा भी अच्छे अंकों से उतीर्ण की। जिसके फलस्वरूप प्रगति कश्यप को हि०प्र० विश्वविद्यालय से प्रतिमाह 35 हजार रूपये फेलोशिप मिल रहा है। पिता नागेन्द्र कश्यप के अनुसार प्रगति कश्यप उर्फ चारू बचपन से पढ़ने में बहुत ही तेज थी। स्कूल का कार्य समय पर पूरा करना तथा समर्पित होकर पढ़ाई करना इनकी आदत में शुमार था। बताया कि बेटी द्वारा स्वयं अपना लक्ष्य तय किया गया है। प्रगति के मामा नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश आर्य ने बताया कि उनके द्वारा प्रगति को सिविल सर्विस में जाने की सलाह दी गई परंतु उन्हें केवल शिक्षाविद बनना पसंद था। इनकी माता संध्या कश्यप ने बताया कि सरकारी सेवा में होने पर वह बच्चों को उचित समय नहीं दे पाती थी यह उपलब्धि प्रगति की अपनी मेहनत का फल है। उन्होने बताया कि नौकरी मिलने के उपरांत भी वह अपनी पढ़ाईे जारी रखेगी क्योंकि उनका उद्देश्य राजनीति शास्त्र में पीएचडी करना है जिसके लिए वह प्रयत्नशील है।

