ब्यूरो रिपोर्ट
सरकारी रिकॉर्ड में कथित तौर पर हुई एक गलती का खामियाजा एक 100 फीसदी दिव्यांग व्यक्ति को भुगतना पड़ रहा है। सुभाष चंद की दिव्यांगता पेंशन पिछले 10 महीने से बंद होने के कारण उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है। परिवार के पास पेंशन के अलावा आय का कोई अन्य प्रमुख साधन नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में दवाइयों, भोजन और दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।वृद्ध और बीमार परिजन उठा रहे देखभाल का बोझसुभाष चंद की देखभाल उनके वृद्ध और बीमार परिजन कर रहे हैं। पूरी तरह दूसरों पर निर्भर सुभाष चंद के लिए पेंशन की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का सहारा है। ऐसे में पिछले 10 महीने से पेंशन बंद रहने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई है।पेंशन बहाल करने की मांग, इच्छामृत्यु पर विचार की गुहारलंबे समय से पेंशन बहाल नहीं होने से परेशान सुभाष चंद ने सरकार से उनकी दिव्यांगता पेंशन तत्काल बहाल करने की मांग की है। उन्होंने अपनी पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए इच्छामृत्यु की अनुमति देने पर विचार करने की भी गुहार लगाई है। उन्होंने जिलाधीश से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और बंद पड़ी पेंशन को जल्द बहाल करवाने का आग्रह किया है।ई-केवाईसी में गलत श्रेणी दर्ज होने का आरोपइस मामले में सबसे अहम सवाल पेंशन बंद होने के कारण को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ई-केवाईसी के दौरान श्रेणी गलत दर्ज होने की बात सामने आई है। यदि रिकॉर्ड में हुई किसी त्रुटि के कारण पेंशन रोकी गई है, तो उसकी जांच कर सुधार करना जरूरी है, ताकि पात्र लाभार्थी को उसकी सहायता से वंचित न रहना पड़े।सरकार की ओर से डिजिटल सत्यापन और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन ऐसी प्रक्रिया में हुई त्रुटि का असर जरूरतमंद व्यक्ति की जिंदगी पर पड़ सकता है। सुभाष चंद का मामला प्रशासन के सामने यह सवाल खड़ा करता है कि रिकॉर्ड की गलती को समय रहते ठीक कर उनकी पेंशन बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और सुभाष चंद को उनकी लंबित पेंशन का लाभ कब तक मिल पाता है।