ब्यूरो रिपोर्ट।
हिमाचल प्रदेश के 158 सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती का मामला अब सरकार के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन गया है। शिक्षा विभाग की ओर से 5,623 सेवारत शिक्षकों के समायोजन का प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए सरकार फिलहाल कोई जल्दबाजी करने के मूड में नहीं है।सूत्रों के अनुसार यदि इन शिक्षकों को सीबीएसई स्कूलों में समायोजित किया जाता है तो उनके स्थान पर अन्य शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी। इससे प्रदेशभर में तबादलों की लंबी श्रृंखला शुरू होने की संभावना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के चलते 10 हजार से अधिक शिक्षकों के तबादले करने पड़ सकते हैं।मामले के व्यापक प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रभाव को देखते हुए सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। शिक्षकों के समायोजन और नई नियुक्तियों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तृत मंथन किया जा रहा है। यही कारण है कि यह मुद्दा अब मंत्रिमंडल स्तर तक पहुंच चुका है।सरकार ने इस विषय की समीक्षा के लिए चार सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया है। समिति विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था किस प्रकार की जाए ताकि अन्य सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर न पड़े।शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले प्रदेश के सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, रिक्त पदों की स्थिति और संभावित तबादलों के प्रभाव का विस्तृत आकलन जरूरी है। फिलहाल सरकार संतुलित और व्यावहारिक समाधान तलाशने में जुटी हुई है, ताकि शिक्षा व्यवस्था पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
