7 साल बाद भी नहीं हुआ 6 करोड़ का उपयोग, पंचायतों से मांगा जवाब

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ब्यूरो रिपोर्ट।

हिमाचल प्रदेश की 647 ग्राम पंचायतें 14वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त करीब छह करोड़ रुपये की राशि सात वर्ष बीत जाने के बावजूद खर्च नहीं कर पाई हैं। केंद्र सरकार के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है। ऐसे में अब 16वें वित्त आयोग के तहत नई धनराशि जारी होने की तैयारी के बीच पुरानी राशि का उपयोग न होने से पंचायतों को आगामी बजट आवंटन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।मामले को गंभीरता से लेते हुए पंचायती राज विभाग ने प्रदेश के सभी खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को लंबित राशि को निर्धारित नियमों के अनुसार शीघ्र खर्च करने तथा उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही सभी जिलों के उपायुक्तों को भी इस प्रक्रिया की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि का वर्षों तक उपयोग न होना योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है। जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राशि स्वीकृत मदों पर नियमानुसार खर्च की जाए और इसकी प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर विभाग को भेजी जाए।सरकार ने संकेत दिए हैं कि लंबित मामलों की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पंचायतों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल योजनाओं, सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण तथा अन्य ग्रामीण विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई थी। बावजूद इसके बड़ी संख्या में पंचायतों द्वारा धनराशि का उपयोग नहीं किया जा सका, जिससे विकास कार्य भी प्रभावित हुए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबित राशि का समय पर उपयोग और उसका लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया गया तो भविष्य में मिलने वाली वित्त आयोग की अनुदान राशि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विभाग अब इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर लंबित धनराशि के उपयोग को सुनिश्चित करने में जुट गया है।

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