नाहन (संध्या कश्यप ,संवाददाता ),
मिड-डे मील वर्कर्ज यूनियन (संबंधित सीटू ) के जिला अध्यक्ष विनीत, महासचिव संदीप, सुदेश, किरण, तथा यूनियन के पदाधिकारी विरंदर ठाकुर, सत्या, निर्मला, प्रोमिला, किरण, ओम प्रकाश, फते सिंह, उदय, जय पाल, अंजना, आशा धीमान, कामीनी, सहित अन्य प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से प्रेस को जारी बयान में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड देश के करोड़ों मज़दूरों, विशेषकर मिड-डे मील वर्करों जैसे स्कीम वर्कर्स के अधिकारों पर सीधा हमला हैं।
यूनियन नेताओं ने कहा कि इन चार लेबर कोड के ज़रिये सरकार मज़दूरों के दशकों पुराने अधिकारों—न्यूनतम वेतन, काम की सुरक्षा, यूनियन बनाने का अधिकार और सामाजिक सुरक्षा—को कमजोर करना चाहती है। मिड-डे मील वर्कर पहले ही अल्प मानदेय, अस्थायी दर्जे और सामाजिक असुरक्षा में काम कर रहे हैं, और लेबर कोड लागू होने के बाद उनकी स्थिति और बदतर हो जाएगी।
प्रेस बयान में कहा गया कि मिड-डे मील वर्कर न तो नियमित कर्मचारी माने जाते हैं और न ही उन्हें पूर्ण मज़दूर अधिकार दिए जाते हैं। चार लेबर कोड इस अन्याय को खत्म करने के बजाय उसे कानूनी जामा पहनाने का काम कर रहे हैं। मिड-डे मील वर्कर्ज यूनियन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
चारों लेबर कोड को तत्काल रद्द किया जाए
मिड-डे मील वर्करों को 12 महीने का पूरा वेतन दिया जाए
सालाना, आकस्मिक व चिकित्सीय छुट्टियों का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए
मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए
मिड-डे मील वर्करों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए
सेवानिवृत्ति पर पेंशन, ईपीएफ और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए
कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार बच्चों के पोषण और शिक्षा की बात तो करती है, लेकिन उस योजना को चलाने वाले मज़दूरों को अधिकार देने से बचती है। यह नीति न केवल मज़दूर विरोधी है, बल्कि सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ़ है।
अंत में यूनियन ने सभी मिड-डे मील वर्करों और श्रमिक संगठनों से आह्वान किया कि वे चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ एकजुट होकर संघर्ष तेज़ करें, और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए 12 फरवरी क़ो सभी जिला के स्कूलों में पूर्ण हड़ताल करेंगे मज़बूत आंदोलन खड़ा करेंगे
