शिमला (विकास शर्मा,ब्यूरो चीफ),
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्षों से बिना ठोस निगरानी के संचालित हो रहे सरकारी बैंक खातों को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बीते वर्ष आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में 50 हजार से अधिक सरकारी बैंक खाते संचालित हो रहे हैं। इसके बाद सरकार ने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया।इस सख्ती की शुरुआत शिक्षा विभाग से कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब इन खातों में मिलने वाला ब्याज संबंधित विभागों को न जाकर सीधे सरकारी खजाने में जमा होगा, जिससे सरकारी धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश
इस दिशा में निदेशालय स्कूल शिक्षा द्वारा सभी उप निदेशकों (प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा) को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। आदेशों के अनुसार अब एक ही ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) कार्यालय के नाम पर चल रहे कई बैंक खातों को बंद किया जाएगा और उनकी जगह एक सिंगल बैंक अकाउंट संचालित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि एकल बैंक खाता प्रणाली से
सरकारी धन के प्रवाह पर बेहतर नियंत्रण रहेगा
वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी
जवाबदेही तय करने में आसानी होगी
केंद्र प्रायोजित योजनाएं रहेंगी अलग
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र प्रायोजित योजनाएं इस नई व्यवस्था से पूरी तरह अलग रहेंगी। इनमें सर्व शिक्षा अभियान (SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA), STARS योजना, मिड-डे मील (MDM), NLIP और विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के लिए पहले की तरह अलग बैंक खाते संचालित किए जाएंगे, ताकि उनके संचालन में किसी तरह की बाधा न आए।
सरकार के इस फैसले को प्रदेश में वित्तीय अनुशासन की दिशा में बड़ा सुधारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में अन्य विभागों में भी इसी तरह की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
